इस्लामाबाद में समझौते के लिए बातचीत फेल हो जाने के बाद फिर से अमेरिका और ईरान आमने सामने दिख रहे हैं। मिडिल ईस्ट में फिर से जंग शुरू होने का डर बढ़ गया है। अमेरिका आज से होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी लागू करने जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नाकेबंदी का मकसद ईरान की तेल बिक्री रोकना है। ट्रम्प के मुताबिक, कई अन्य देश भी इस प्रयास में अमेरिका का साथ दे रहे हैं। ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान हुआ है और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 158 जहाज तबाह किए जा चुके हैं। 

यूएस सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी पर सभी ईरानी बंदरगाहों सहित ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले या प्रस्थान करने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ नाकाबंदी को निष्पक्ष रूप से लागू किया जाएगा। होर्मुज के नाकेबंदी की पहले घोषणा ट्रंप ने की थी। एक लंबे सोशल मीडिया पोस्ट में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका लक्ष्य होर्मुज में लगी माइंस को साफ करना और इसे सभी शिपिंग के लिए फिर से खोलना है, लेकिन ईरान को जलमार्ग को नियंत्रित करने से लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

नाकेबंदी के ऐलान के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 104 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका ईरान पर दोबारा सैन्य हमले करने पर भी विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि सभी विकल्प खुले हैं और हालात के हिसाब से आगे का फैसला लिया जाएगा।

ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी के ऐलान से एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.84% गिरा, जबकि टॉपिक्स 0.42% नीचे रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.83% लुढ़क गया। घरेलू शेयर मार्केट की बात करें तो सोमवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स 1600 अंक तक लुढ़क गया। निवेशकों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि नाकेबंदी के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।