दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में बुधवार को उस समय बड़ा सुरक्षा संकट पैदा हो गया जब कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। घटना के दौरान एक पायलट पर चाकू से हमला किए जाने की खबर सामने आई है। इसी बीच विमान तेजी से नीचे आया और उससे पहले सामान्य इमरजेंसी तथा बाद में अनलॉफुल इंटरफेरेंस यानी हाईजैक से जुड़ा अलर्ट प्रसारित हुआ। स्थिति बिगड़ने पर विमान को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया और वहां सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। फ्लाईदुबई के मुताबिक विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।

घटना के शुरुआती चरण में विमान के हाईजैक होने की आशंका से इजराइल का सुरक्षा तंत्र सक्रिय हो गया था। इजराइली लड़ाकू विमान भी रवाना किए गए थे। हालांकि, बाद में इजराइली अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच में यह मामला पारंपरिक हाईजैकिंग का नहीं बल्कि विमान के भीतर हुई गंभीर झड़प से जुड़ा दिखाई दे रहा है। घटना की परिस्थितियों और इसके पीछे की वजह की जांच जारी है।

फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान करीब 33 से 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। इसके बाद उसने बेहद तेजी से नीचे आना शुरू किया। अलग-अलग ट्रैकिंग रिपोर्टों में विमान के करीब 17 हजार फीट या उससे अधिक नीचे आने की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट करीब एक मिनट के भीतर हुई थी। इसके बाद विमान ने अपनी दिशा बदली और ताबुक की ओर बढ़ गया।

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इसी दौरान विमान से पहले 7700 इमरजेंसी कोड और फिर 7500 कोड प्रसारित हुआ। 7700 सामान्य विमान आपात स्थिति के लिए इस्तेमाल होता है। जबकि, 7500 विमान में गैरकानूनी हस्तक्षेप या संभावित हाईजैकिंग का संकेत देता है। इन संकेतों के कारण इजराइली अधिकारियों को विमान की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका हुई।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ जो बाद में हाथापाई में बदल गया। यात्रियों के हवाले से आई जानकारी, में एक पायलट द्वारा दूसरे पर चाकू से हमला किए जाने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि विमान को खतरनाक तरीके से नीचे लाने की कोशिश के बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों ने हस्तक्षेप किया।

यात्रियों ने कॉकपिट के अंदर से चीखने की आवाजें सुनी। एक यात्री के मुताबिक, कॉकपिट का दरवाजा खुलने पर वहां खून दिखाई दिया और एक पायलट घायल था। रिपोर्टों में कहा गया है कि कुछ यात्रियों और क्रू सदस्यों ने कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद की।

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि विमान में यात्रा कर रहे दो अन्य पायलटों ने स्थिति संभालने में मदद की। हालांकि, घटना के पूरे क्रम और कॉकपिट में किसने किस समय विमान का नियंत्रण संभाला इसे लेकर जांच एजेंसियों की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

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यात्रियों के अनुसार, हमले में घायल पायलट के शरीर से काफी खून निकल रहा था। एक यात्री ने बताया कि विमान में मौजूद एक इजराइली डेंटिस्ट ने घायल पायलट को प्राथमिक चिकित्सा देने में मदद की। दोनों पायलटों को बाद में अलग-अलग चोटों के साथ अस्पताल ले जाने की जानकारी सामने आई है।

फ्लाईदुबई ने आधिकारिक तौर पर इतना कहा कि FZ1073 में रास्ते में एक घटना हुई और विमान ताबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गया। एयरलाइन ने बताया कि उसके दल संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और यात्रियों तथा क्रू की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

हाईजैक जैसे संकेत मिलने के बाद इजराइल ने लड़ाकू विमान रवाना किए और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सुरक्षा अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। शुरुआती आशंका यह थी कि विमान में बड़ी संख्या में इजराइली नागरिक होने के कारण यह किसी गंभीर सुरक्षा घटना का हिस्सा हो सकता है।

विमान को बाद में सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित ताबुक एयरपोर्ट पर उतारा गया। फ्लाइट में यात्रियों की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में अलग बताई गई है लेकिन करीब 180 लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या में इजराइली नागरिक शामिल थे। सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है।

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इजराइली सुरक्षा अधिकारी इस घटना को संभावित आतंकी हमले के एंगल से भी जांच रहे हैं। कुछ इजराइली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक पायलट ने विमान को जानबूझकर नीचे ले जाने की कोशिश की हो सकती है। वहीं, अन्य रिपोर्ट में संभावित आत्मघाती प्रयास की आशंका भी जांच का हिस्सा बताए जाने की बात सामने आई है। अभी तक घटना के पीछे की मंशा आधिकारिक तौर पर तय नहीं हुई है।

इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, घटना की जांच के दौरान पायलटों की भूमिका, कॉकपिट में हुई झड़प और विमान के अचानक नीचे आने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। इसलिए फिलहाल इसे निश्चित रूप से आतंकी हमला बताना जल्दबाजी होगी।

इजराइली मीडिया में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया कि यदि समय रहते कॉकपिट में स्थिति नियंत्रित नहीं की जाती तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे। एक अधिकारी ने इसकी तुलना 2001 के 9/11 हमलों जैसी संभावित त्रासदी से की।