UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में भारत की 5 धरोहरें, MP की 4 साइट शामिल

UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में भारत की 5 नई धरोहरें शामिल हुई हैं। इनमें मध्य प्रदेश की 4 ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं।

Updated: Sep 30, 2026, 01:03 PM IST

UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की संभावित सूची यानी टेंटेटिव लिस्ट में भारत की पांच नई प्रविष्टियां जोड़ी गई हैं। इनमें चार महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें मध्य प्रदेश की हैं। जबकि, पांचवीं प्रविष्टि भारत और दक्षिण अफ्रीका से जुड़े महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के ऐतिहासिक स्थलों का समूह है। नई प्रविष्टियों के साथ UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में भारत की साइटों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है।

मध्य प्रदेश से शामिल चार धरोहरों में विदिशा की उदयगिरि गुफाएं, धार की बाघ गुफाएं, मुरैना की चंबल घाटी में स्थित बटेश्वर, पदावली, ककनमठ मंदिर समूह और रायसेन का गिन्नौरगढ़ किला शामिल है। इन सभी स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत इन्हें संभावित विश्व धरोहर के तौर पर महत्वपूर्ण बनाती है। 

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विदिशा जिले में स्थित उदयगिरि गुफाएं भोपाल से करीब 60 किलोमीटर दूर हैं। यहां कुल 20 गुफाएं हैं जिनमें प्राचीन मंदिरों, मूर्तियों और धार्मिक अवशेषों का समृद्ध संग्रह मिलता है। इन गुफाओं में हिंदू परंपरा से जुड़ी कलाकृतियां प्रमुख हैं। जबकि, कुछ स्थानों पर जैन और अन्य धार्मिक परंपराओं के अवशेष भी दिखाई देते हैं।

उदयगिरि की सबसे चर्चित कलाकृति भगवान विष्णु के वराह अवतार की विशाल शैल मूर्ति है। इसमें विष्णु को वराह यानी जंगली सूअर के रूप में भूदेवी को समुद्र से बाहर निकालते हुए दर्शाया गया है। यह शिल्प गुप्तकालीन मूर्तिकला का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है और उस दौर की धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ राजसत्ता और कला के संबंधों को भी समझने में मदद करता है।

धार जिले के बाघ कस्बे के नजदीक बाघिनी नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र में स्थित बाघ गुफाएं अपनी प्राचीन चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध हैं। धार से इनकी दूरी करीब 97 किलोमीटर है। यहां चट्टानों को काटकर बनाई गई नौ बौद्ध गुफाएं हैं।

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इन गुफाओं की दीवारों पर बने चित्रों में मानव आकृतियों के साथ फूल-पत्तियों, ज्यामितीय आकृतियों और तत्कालीन सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। चित्रकारी के लिए दीवारों पर मिट्टी और दूसरे पदार्थों से प्लास्टर तैयार किया जाता था। जिसके बाद रंगों से चित्र बनाए जाते थे। यहां टेम्परा तकनीक के इस्तेमाल के प्रमाण भी मिलते हैं।

रायसेन जिले का गिन्नौरगढ़ किला भोपाल से करीब 60 से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक प्राचीन पहाड़ी दुर्ग है जो रातापानी क्षेत्र के आसपास घने जंगल और पहाड़ी भूभाग के बीच स्थित है। गिन्नौरगढ़ को पुराने गोंड शासकों की प्रमुख किलेबंद राजधानियों में माना जाता है। इसकी खासियत केवल इसके ऐतिहासिक महत्व में नहीं बल्कि इसकी भौगोलिक स्थिति में भी है। ऊंची पहाड़ी पर बने इस किले के चारों ओर जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण इसका स्थान सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है।

मुरैना जिले की चंबल घाटी में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककनमठ के मंदिरों को भी नई प्रविष्टियों में जगह मिली है। ये मंदिर मध्य भारत में मंदिर वास्तुकला के अलग-अलग चरणों के विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। बटेश्वर मंदिर समूह में 200 से ज्यादा छोटे मंदिर हैं। वहीं, पदावली मंदिर पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। ककनमठ मंदिर नागर शैली के विकसित स्वरूप की स्थापत्य विशेषताओं को सामने रखता है। इन मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ और इनके विकास का संबंध गुर्जर, प्रतिहार तथा कच्छपघात शासकों के दौर से जोड़ा जाता है।

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UNESCO की नई सूची में शामिल पांचवीं प्रविष्टि Sites of Satyagraha है। यह भारत और दक्षिण अफ्रीका में स्थित नौ ऐतिहासिक स्थानों का समूह है, जिन्हें महात्मा गांधी के सत्याग्रह के विकास और उनके अहिंसक आंदोलन की यात्रा से जोड़ा गया है। सत्याग्रह की अवधारणा का शुरुआती प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। बाद में गांधी ने इसी विचार को भारत में विभिन्न आंदोलनों का आधार बनाया। इस समूह में दक्षिण अफ्रीका का पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट शामिल हैं। 

भारत की ओर से चंपारण, साबरमती आश्रम, मणि भवन, हरिजन सेवक संघ, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति को इसमें शामिल किया गया है। इन नौ स्थलों के माध्यम से गांधी के सत्याग्रह के शुरुआती प्रयोग से लेकर भारत में उसके व्यापक अहिंसक आंदोलनों के रूप में विकसित होने की कहानी को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

किसी स्थल का UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में पहुंचना उसे तत्काल वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिलने का मतलब नहीं है। यह उस प्रक्रिया का शुरुआती चरण है जिसमें कोई देश उन संभावित धरोहर स्थलों को सूचीबद्ध करता है जिन्हें आगे चलकर UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट के लिए नामित किया जा सकता है।

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इस सूची में शामिल होने के बाद संबंधित स्थल को विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा देने पर आगे विचार किया जाता है। इसलिए उदयगिरि गुफाएं, बाघ गुफाएं, गिन्नौरगढ़, चंबल घाटी के मंदिर समूह और Sites of Satyagraha फिलहाल UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं, इन्हें अभी UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट का अंतिम दर्जा नहीं मिला है।