अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बहुत जल्द खोल दिया जाएगा और यह काम ईरान के सहयोग से या उसके बिना भी पूरा किया जा सकता है।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है और यहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा। यदि ऐसा करने की कोशिश हुई तो अमेरिका उसे रोकने के लिए कदम उठाएगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार किसी भी समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यही होगी कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। 

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन परिवर्तन उनकी शर्तों में शामिल नहीं है, लेकिन उनका कहना था कि देश के भीतर पहले से ही कई बदलाव दिखाई दे रहे हैं। इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत को लेकर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह इसी बैठक से तय होगा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले कई दशकों से अलग-अलग अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के साथ बातचीत करते रहे हैं, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने के लिए भी तैयार है और उसके युद्धपोतों को आधुनिक हथियारों से लगातार सुसज्जित किया जा रहा है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों को सबसे उन्नत हथियारों से लैस किया जा रहा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका प्रभावी उपयोग किया जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले भी ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाइयों में अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है। ऐसे में एक ओर बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर सैन्य तैयारी भी पूरी रखी जा रही है। अब सबकी नजर इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी है, जिससे तय होगा कि हालात शांत होंगे या क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

दूसरी तरफ, ईरान के तेवर भी बेहद सख्त हैं। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर साफ कर दिया कि बातचीत शुरू होने से पहले उनकी दो शर्तें पूरी होनी चाहिए। पहली लेबनान में इजरायली हमलों पर तुरंत रोक लगे और दूसरी अमेरिका की ओर से फ्रीज की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को तुरंत रिलीज किया जाए। ईरान ने दो टूक कहा है कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, वार्ता का कोई मतलब ही नहीं है।