पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने अडियाला जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि इमरान खान को 48 घंटे के भीतर इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में ट्रांसफर किया जाए। उनकी स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत आकलन करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड भी गठित किया जाएगा। कोर्ट ने इमरान की बहनों से मुलाकात और उनके बेटों से बातचीत से जुड़ी जानकारी भी जेल प्रशासन से मांगी है।

तीन जजों की बेंच इमरान के इलाज और परिवार से मुलाकात से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की थी। उनके साथ जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन की ओर से पेश की गई मेडिकल रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी भी जताई। अदालत ने कहा कि उसके सामने विस्तृत रिपोर्ट के बजाय केवल मेडिकल समरी रखी गई है। कोर्ट ने जेल प्रशासन से इमरान की स्वास्थ्य स्थिति से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

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जेल अधीक्षक की ओर से सोमवार को इमरान की दो पेज की मेडिकल रिपोर्ट अदालत में जमा की गई थी। इसमें 4 नवंबर 2023 से 10 अगस्त 2026 तक इमरान की 39 मेडिकल जांचों का उल्लेख है। रिपोर्ट में आंख से जुड़ी बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन का भी जिक्र किया गया है। इसके इलाज के बाद प्रभावित आंख की दृष्टि लगभग सामान्य होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

अदालत में रखी मेडिकल जानकारी के अनुसार, इमरान के ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, दिल की धड़कन तेज होने और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आई हैं। हालिया जांच में उनका ब्लड प्रेशर 140/80 और नाड़ी की गति 54 प्रति मिनट दर्ज की गई। फरवरी में उनका ब्लड प्रेशर 120/80 था। इन स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए कोर्ट ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से उनकी विस्तृत जांच कराने का फैसला किया है। मेडिकल बोर्ड में कई विशेषज्ञों के साथ इमरान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके निजी डॉक्टर को भी शामिल करने का आदेश दिया गया है। बोर्ड इमरान की पुरानी और मौजूदा मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा कर यह तय करेगा कि उन्हें किस तरह के उपचार की आवश्यकता है।

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डॉक्टर यह भी जांच करेंगे कि ब्लड क्लॉट की समस्या क्यों हो रही है और भविष्य में इससे कोई गंभीर खतरा तो नहीं है। जांच के बाद बोर्ड यह राय देगा कि इमरान का इलाज जेल में संभव है या उन्हें अस्पताल में भर्ती रखकर उपचार की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की बहनों से मुलाकात के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि परिवार के सदस्यों से मुलाकात की अनुमति देना किसी तरह की रियायत या एहसान नहीं बल्कि उनका मौलिक अधिकार है।

अदालत ने पिछले तीन सालों में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों का रिकॉर्ड मांगा है। इसके अलावा उनके बेटों से हुई बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से भी इमरान की स्वास्थ्य स्थिति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने को कहा है। जस्टिस नईम अख्तर अफगान ने पार्टी से इस मामले को लेकर संयम बरतने की बात कही। इमरान की मेडिकल स्थिति को लेकर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी कहा है कि आने वाले तीन महीने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उनके मुताबिक, इसी अवधि में यह स्पष्ट होगा कि इमरान की हालत में सुधार होता है या उनकी बीमारी स्थायी रूप लेती है।

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73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी सबसे पहले तोशाखाना मामले में तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद हुई थी। इसके बाद सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामलों में भी उनके खिलाफ कार्रवाई हुई। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें राहत मिली। जबकि, तोशाखाना मामले की सजा पर भी रोक लगाई गई थी। हालांकि, अन्य मामलों में कार्रवाई जारी रहने के कारण इमरान जेल से बाहर नहीं आ सके।

इमरान खान और उनकी पार्टी लगातार आरोप लगाती रही है कि साल 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और उनका उद्देश्य उन्हें राजनीति तथा चुनावी गतिविधियों से दूर रखना है। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और मामलों को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताती हैं।

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