तेहरान। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, शक्तिशाली युद्धपोत USS त्रिपोली अब इस क्षेत्र में पहुंच चुका है। इसके साथ ही करीब 3,500 मरीन और नौसैनिकों का बड़ा दल भी तैनात किया गया है। यह तैनाती ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी ऑपरेशन करने के विकल्प के बारे में सोच रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजने की योजना बना रहा है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कूटनीति के साथ-साथ सैन्य विकल्प भी मौजूद रहें। USS त्रिपोली कोई साधारण जहाज नहीं है। यह अमेरिका का ‘अमेरिका-क्लास’ एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, जो समुद्र से जमीन पर सीधे हमले करने में सक्षम है। इस जहाज पर लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ऑस्प्रे जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तैनात हैं। इसके अलावा F-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट भी इस तैनाती का हिस्सा हैं। इस पूरे दल में 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट शामिल है, जो तेजी से हमले, कब्जा और बचाव जैसे ऑपरेशन के लिए जानी जाती है।

अमेरिका पहले ही इस इलाके में पिछले 20 सालों का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा कर चुका है। यहां दो एयरक्राफ्ट कैरियर, कई युद्धपोत और करीब 50,000 सैनिक पहले से मौजूद हैं। ऐसे में USS त्रिपोली की एंट्री इस बात का संकेत मानी जा रही है कि अमेरिका अब हर स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहा है। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका बिना जमीनी सैनिक उतारे भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि राष्ट्रपति को हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड फोर्ड हाल ही में मरम्मत के लिए मिडिल ईस्ट से बाहर चला गया है। इसके बावजूद नई फोर्स की तैनाती यह दिखाती है कि अमेरिका पीछे हटने के बजाय अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। माना जा रहा है कि इन सैनिकों को ईरान के अहम ठिकानों, खासकर खर्ग द्वीप के आसपास तैनात किया जा सकता है, जहां से ईरान अपने तेल का बड़ा हिस्सा निर्यात करता है।