नई दिल्ली। पक्षिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रुपये की सेहत बिगड़ती जा रही है। भारतीय रुपया आज यानी 13 मई को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.75 तक पहुंच गया। दिन की शुरुआत में रुपये में हल्की मजबूती देखने को मिली थी, लेकिन बाद में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती के दबाव में रुपया फिर टूट गया।

इससे पहले मंगलवार 12 मई को भी रुपया 40 पैसे टूटकर 95.68 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। यानी लगातार दूसरे कारोबारी दिन रुपये पर दबाव देखने को मिला है। शुरुआती कारोबार में रुपया अपने पिछले बंद स्तर से 16 पैसे मजबूत होकर 95.52 प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। बाजार को उम्मीद थी कि सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने के बाद डॉलर की मांग कुछ कम हो सकती है। इसी वजह से रुपये को शुरुआती सपोर्ट मिला।

सरकार ने हाल में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। सरकार का मकसद गोल्ड और सिल्वर आयात कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को घटाना है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है। इसके बावजूद भी रुपए की सेहत में सुधार नहीं दिख रही है।

साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। दरअसल, ईरान संकट के कारण ग्लोबल मार्केट में सप्लाई में रुकावट आने का डर है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होता है।

वहीं पीएम मोदी ने लोगों से ईंधन की खपत और सोने की खरीद में संयम बरतने का निवेदन करने के बाद निवेशकों का मनोबल और भी कम हो गया है, जिस कारण गोल्‍ड लिंंक्‍ड डॉलर में तेजी आई है। इसके अलावा, आरबीआई के हस्‍तक्षेप के बाद भी भारतीय मुद्रा में गिरावट की संभावना कम होती नहीं दिख रही है।