भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक दर्दनाक घटना की खबर सामने आई है। 14 वर्षीय छात्र अंश साहू ने ऑनलाइन गेमिंग की लत में आत्महत्या कर ली। पिपलानी थाना क्षेत्र की श्रीराम कॉलोनी में रहने वाले आठवीं कक्षा के छात्र अंश साहू ने सोमवार दोपहर अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मोबाइल गेम खासकर प्रतिबंधित ब्लू व्हेल जैसे खतरनाक ऑनलाइन गेम के दबाव ने मासूम को यह भयावह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
घटना के समय अंश घर पर अकेला था जबकि उसके माता-पिता रिश्तेदार की तेरहवीं में गए हुए थे। जब परिजन घर लौटे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक आवाज देने के बाद दरवाजा खुलवाया गया जहां अंदर अंश फंदे से लटका मिला। उसे तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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अंश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और दोनों निजी स्कूल में शिक्षक हैं। परिवार पहले से ही अंश के नाना के निधन के कारण शोक में था और उसी सिलसिले में तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने गया था। परिजनों के मुताबिक, अंश को पिछले कुछ समय से मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने की गंभीर लत लग गई थी। पढ़ाई पर असर पड़ने और व्यवहार में बदलाव के कारण परिवार ने एक महीने पहले ही उससे मोबाइल फोन छीन लिया था।
इसके बावजूद वह किसी तरह गेम खेलने की कोशिश करता रहता था। अंश के मामा भोला साहू ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उसके दादा के बैंक खाते से फ्री फायर गेम से जुड़े ट्रांजेक्शन में करीब 28 हजार रुपये कट गए थे। जिसके बाद परिवार ने सख्ती बढ़ा दी थी।
पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला लेकिन अंश का मोबाइल फोन कमरे से बरामद किया गया है जिसकी जांच की जा रही है। एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी के अनुसार, आत्महत्या के पीछे मोबाइल गेमिंग की भूमिका होने की आशंका है। हालांकि, वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पिपलानी थाना प्रभारी चंद्रिका यादव ने भी प्रारंभिक जांच में मोबाइल गेम की लत को संभावित वजह बताया है। पड़ोसियों का कहना है कि अंश शांत स्वभाव का बच्चा था लेकिन हाल के दिनों में उसने अकेले रहना शुरू कर दिया था। बीते कुछ दिनों से उसके व्यवहार में भी बदलाव होने लगा था।
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साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लू व्हेल जैसे गेम महज मनोरंजन नहीं बल्कि एक संगठित मनोवैज्ञानिक जाल होते हैं। यह गेम करीब 50 दिनों तक चलता है जिसमें एक अज्ञात एडमिन खिलाड़ी को रोजाना टास्क देता है। शुरुआत साधारण कामों से होती है लेकिन धीरे-धीरे मानसिक दबाव बढ़ाते हुए आत्महत्या जैसे खतरनाक टास्क तक पहुंचाया जाता है। यदि खिलाड़ी बीच में गेम छोड़ने की कोशिश करे तो उसे और उसके परिवार को धमकाया जाता है। भारत सरकार ने साल 2017 में इस गेम पर प्रतिबंध लगा चुकी है लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि यह अलग-अलग नामों से इंटरनेट पर अब भी मौजूद है।
यह ऐसा कोई अकेला मामला नहीं है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में भी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। जहां तीन बहनों ने कथित तौर पर ऑनलाइन कोरियन गेम के प्रभाव में आधी रात अपने घर की बालकनी से एक-एक कर छलांग लगाकर जान दे दी। पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों बहनों ने पहले कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और बारी-बारी से नीचे कूद गई। गिरने की तेज आवाज सुनकर सोसाइटी के लोग और सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी।
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पुलिस ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें मौके से बच्चियों की एक डायरी बरामद हुई थी। इस डायरी में बच्चियों ने खुदखुशी की वजह बताई थी। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा, “मम्मी-पापा सॉरी… हम गेम नहीं छोड़ पा रहे हैं। अब आपको एहसास होगा कि हम इस गेम से कितना प्यार करते थे जिसे आप हमसे छुड़वाना चाहते थे।” नोट में यह भी लिखा गया है कि “कोरियन गेम हमारी जिंदगी, हमारी जान है।“