ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में लोकायुक्त पुलिस ने नामांतरण के बदले रिश्वत लेने के आरोप में एक महिला पटवारी को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी रेखा शाक्य को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। जांच में यह भी सामने आया कि वह अपने पति कृष्णकांत शाक्य के माध्यम से आवेदकों से पैसों की मांग करती थी और एक अन्य पटवारी के साथ मिलकर निजी कार्यालय संचालित कर रही थी।

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, मुरार क्षेत्र के सिरसौद गांव निवासी मंशाराम ने अपनी पत्नी सावित्री बाई के नाम जमीन के नामांतरण और बहन गुड्डी बाई की जमीन के सीमांकन के लिए आवेदन दिया था। आरोप है कि आवेदन लंबे समय तक लंबित रखने के बाद पटवारी रेखा शाक्य ने उससे संपर्क करने के लिए एक मोबाइल नंबर दिया। जब मंशाराम ने उस नंबर पर बात की तो वह नंबर रेखा के पति कृष्णकांत शाक्य का निकला।

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शिकायत के मुताबिक, नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने के बदले 15 हजार रुपये की मांग की गई थी। कृष्णकांत ने पहले 3500 रुपये ले लिए और बाद में अतिरिक्त रकम की मांग जारी रखी। परेशान होकर मंशाराम ने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की। शिकायत की पुष्टि के लिए लोकायुक्त ने बातचीत रिकॉर्ड कराने की कार्रवाई की। जिसमें दूसरी किश्त के रूप में पांच हजार रुपये देने की बात सामने आई।

योजना के तहत शिकायतकर्ता को निर्धारित रकम देकर भेजा गया। रेखा शाक्य ने उसे मुरार स्थित एक मकान की तीसरी मंजिल पर बुलाया। वहां उसका पति भी मौजूद था। जैसे ही शिकायतकर्ता ने पांच हजार रुपये सौंपे वैसे ही पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए महिला पटवारी को पकड़ लिया।

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कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम के संपर्क की पुष्टि के लिए रासायनिक परीक्षण किया गया। अधिकारियों के अनुसार, केमिकल युक्त घोल से हाथ धुलवाने पर आरोपी के हाथों का रंग गुलाबी हो गया जिससे नोटों को छूने की पुष्टि हुई। इसके बाद लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने बताया कि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मामले में आरोपी पटवारी के पति की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उसे भी आरोपी बनाया जाएगा। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिस निजी कार्यालय से लेन देन किया जा रहा था उसमें एक अन्य पटवारी की भी सहभागिता हो सकती है। इस संबंध में आगे की जांच जारी है।

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