MP में करोड़ों का मनरेगा घोटाला, क्लोन एप से फर्जी हाजिरी लगाने का आरोप, CBI जांच की तैयारी

मध्य प्रदेश में मनरेगा के एनएमएमएस एप के कथित क्लोन से फर्जी उपस्थिति दर्ज कर करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है। मुरैना में एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

Updated: Jun 20, 2026, 12:01 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में मनरेगा के तहत मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने वाले नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप के कथित क्लोन या टेंपर्ड वर्जन के जरिए फर्जी हाजिरी लगाकर करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है। शुरुआती जानकारी में मुरैना समेत कई जिलों में अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

शिकायत के अनुसार, कुछ लोगों ने एनएमएमएस एप का ऐसा क्लोन या टेंपर्ड संस्करण तैयार कर लिया। जिसके माध्यम से बिना कार्यस्थल पर पहुंचे, बिना जियो टैगिंग और बिना आवश्यक सत्यापन के ही जॉब कार्डधारकों की उपस्थिति दर्ज की जाती रही। आरोप है कि इन्हीं फर्जी उपस्थिति रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान भी जारी कर दिया गया।

शिकायतकर्ता और पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इस मामले को बड़े स्तर का घोटाला बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि पिछले दो सालों से कई जिलों में इस तरह की गड़बड़ियां हो रही थी और केवल पिछले एक साल में ही करीब 200 करोड़ रुपये तक का फर्जी भुगतान किया गया हो सकता है।

मामले में अब तक मुरैना जिले में कार्रवाई भी हो चुकी है। मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने जांच के बाद 1 जून को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद खड़कपुर ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया।

इस प्रकरण ने सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी सरकारी एप का क्लोन बनाकर उपस्थिति और भुगतान प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जा सकता है तो यह साइबर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती है और ऐसे मामलों को रोकने के लिए मजबूत तकनीकी सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

मामले पर मध्य प्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने कहा कि मुरैना में सामने आए प्रकरण की जांच कर एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि यह भारत सरकार का पोर्टल है और पूरे मामले की जानकारी केंद्र सरकार को दे दी गई है। उनके अनुसार, क्लोन एप को बंद करने सहित आवश्यक कार्रवाई भारत सरकार की ओर से की गई है। साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी अन्य स्थान पर भी क्लोन एप के जरिए फर्जी भुगतान तो नहीं किया गया।

गौरतलब है कि वर्तमान मनरेगा योजना 30 जून तक संचालित रहेगी। इसके बाद 1 जुलाई से इसकी जगह वीबी जी राम जी योजना लागू की जाएगी। ऐसे समय में सामने आए इस कथित फर्जीवाड़े ने योजना के क्रियान्वयन और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।