इंदौर। मध्य प्रदेश में इस सीजन स्वाइन फ्लू से पहली मौत का मामला सामने आया है। इंदौर के कोकिलाबेन अस्पताल में इलाज करा रही उज्जैन निवासी 60 वर्षीय सरोज नागर की बुधवार शाम मौत हो गई। मेडिकल जांच में उनके नाक और गले के स्वैब में इन्फ्लुएंजा ए के साथ 2009 H1N1 वायरस की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जबकि, परिजनों का आरोप है कि महिला के संपर्क में आए लोगों की स्क्रीनिंग नहीं की गई थी।

सरोज नागर उज्जैन के ऋषि नगर की रहने वाली थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इंदौर लाकर कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक, वे 31 जुलाई को बीमार पड़ी थी। इससे पहले 30 जुलाई को उनका नाक और गले का स्वैब सैंपल लिया गया था। जांच के लिए सैंपल अहमदाबाद की लैब भेजा गया था और 3 अगस्त को रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों ने H1N1 संक्रमण की पुष्टि की थी।

यह भी पढ़ें:राम मंदिर प्रसाद के नाम पर मिठाई बेचने पर CCPA सख्त, अमेजन पर लगाया 1 लाख रुपए का जुर्माना

उज्जैन के अवंती सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में इन्फ्लुएंजा ए और 2009 H1N1 वायरस मिला। वहीं, इन्फ्लुएंजा बी और कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) की जांच में संक्रमण नहीं पाया गया। परिजनों के अनुसार, सरोज नागर को कोई दूसरी बीमारी नहीं थी। करीब 16 दिन तक इलाज चलने के बाद बुधवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

सरोज नागर के परिवार में उनके पति और दो बेटे हैं। उनके पति रिटायर्ड बैंक कर्मचारी हैं। परिवार का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक सदस्यों की मेडिकल स्क्रीनिंग नहीं कराई गई थी। केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भेजकर परिवार के सदस्यों की सूची तैयार कराई गई थी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि महिला के संपर्क में आए लोगों की पहचान या जांच की प्रक्रिया नहीं की गई।

मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की स्थिति और उससे जुड़े जरूरी तथ्यों की जानकारी जुटा रहा है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई विशेष एडवाइजरी जारी नहीं की गई है। इस संबंध में सीएमएचओ से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन फोन पर उनसे बात नहीं हो सकी। खबर सामने आने के बाद देर रात तक एडवाइजरी जारी किए जाने की संभावना जताई गई है।

यह भी पढ़ें:हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की पाकिस्तान पर बड़ी जीत, 5-3 से हराकर टॉप-8 में पहुंची टीम

स्वाइन फ्लू को H1N1 इंफ्लुएंजा वायरस के संक्रमण के तौर पर जाना जाता है। यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बातचीत के दौरान निकलने वाली लार और बलगम की सूक्ष्म बूंदों के जरिए वायरस दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि यह संक्रमण तेजी से फैलने की क्षमता रखता है।

H1N1 के अलावा H1N2 और H1N3 जैसे वैरिएंट का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि, इंसानों में इनके मामले अपेक्षाकृत कम सामने आते हैं। साल 2009 के दौरान H1N1 संक्रमण को लेकर दुनियाभर में काफी चिंता बढ़ी थी। उस समय सूअरों से बीमारी फैलने की आशंका को लेकर कई जगह गलत धारणाएं भी सामने आई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अच्छी तरह पकाया गया सूअर का मांस खाने से स्वाइन फ्लू फैलने की संभावना बेहद कम होती है।

स्वाइन फ्लू स्वस्थ व्यक्ति में कई बार सामान्य फ्लू की तरह ही गुजर सकता है लेकिन कुछ लोगों में इसके गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक रहता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है। संक्रमण की शुरुआत के दौरान पांच साल से कम उम्र के बच्चों और शुरुआती किशोर उम्र के बच्चों में भी गंभीर असर के मामले अधिक देखे गए थे।

यह भी पढ़ें:दिल्ली के CNG पंप पर गैस भरते समय हुआ धमाका, हादसे में 2 की मौत और कई घायल

स्वाइन फ्लू के इलाज में डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार, एंटीवायरल दवाओं और बुखार नियंत्रित करने वाली दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बीमारी के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना, हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी खाना तथा फल और हरी सब्जियों को आहार में शामिल करना मददगार हो सकता है। हालांकि, लक्षण गंभीर होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।