सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के बहरी थाना क्षेत्र में एक गंभीर मारपीट का मामला सामने आया है। थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित बस स्टैंड के पास कथित तौर पर भाजपा नेता संतोष पाठक ने गुमठी के विवाद को लेकर एक महिला सब्जी विक्रेता के साथ बेरहमी से मारपीट की। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया है लेकिन अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
पीड़ित महिला की पहचान भनवार गांव निवासी हेमा सिंह के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, वह हनुमना मोड़ के पास एक गुमठी लगाकर लंबे समय से सब्जी बेचकर अपना गुजारा कर रही थी। करीब तीन महीने पहले संतोष पाठक ने उसकी गुमठी में तोड़फोड़ कर उसे हटवा दिया और उसी स्थान पर अपनी दुकान रखवाकर उसे किराये पर दे दिया। इसके बाद महिला ने ठेला लगाकर दोबारा सब्जी बेचनी शुरू की लेकिन कुछ समय बाद उसका ठेला भी रहस्यमय तरीके से गायब कर दिया गया।
ठेला गायब होने के बावजूद जब महिला दोबारा उसी जगह बैठकर सब्जी बेचने पहुंची तो आरोपी ने कथित तौर पर गाली गलौज करते हुए उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। जिस जमीन को लेकर यह पूरा विवाद है उसे सरकारी जमीन बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विवाद लंबे समय से चल रहा था लेकिन प्रशासन की ओर से समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
आरोपी संतोष पाठक को क्षेत्रीय भाजपा विधायक विश्वामित्र पाठक का करीबी बताया जा रहा है। इसी कारण मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। बहरी पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर सामान्य धाराओं में केस दर्ज किया है लेकिन घटना के कई घंटे और दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए बहरी थाने में पदस्थ थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िता का पति पिछले 15 सालों से उसी स्थान पर गुमठी लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। तीन महीने पहले आरोपी ने उसकी गुमठी तोड़कर वहां अपनी खुलवा दी। पीड़िता लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाती रही लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। जिसका नतीजा यह रहा कि आरोपी के हौसले बढ़े और मारपीट की घटना हुई।
मामले में पुलिस की निष्क्रियता उस वक्त और स्पष्ट हो गई जब घटना को अंजाम देने के बाद भी आरोपी खुलेआम फेसबुक लाइव के जरिए अपनी सफाई देता रहा। वहीं, पीड़ित महिला न्याय की आस में वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। स्थानीय लोगों और विपक्ष का आरोप है कि अगर आरोपी किसी राजनीतिक संरक्षण में न होता तो अब तक उसकी गिरफ्तारी हो चुकी होती।