भोपाल। मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में फिर से माफी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के ठीक दो दिन पहले शाह का यह माफीनामा सामने आया है। उन्होंने कहा कि उनसे आवेश में अपशब्द निकले थे। भविष्य में फिर कभी उनसे ऐसी गलती नहीं होगी। यह चौथी बार है इस मामले में उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर माफीनामे का वीडियो जारी किया है। वीडियो में शाह कहते हैं, 'मैंने पहले भी कई बार कहा है, मेरा ऐसा कोई उद्देश्य नहीं था कि किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज, किसी वर्ग का अपमान हो। वे शब्द निस्संदेह मेरी भावना के अनुरूप नहीं थे। वे शब्द देश भक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकले थे।'
विजय शाह ने आगे कहा, 'गलती के पीछे की भावना को अवश्य देखा जाना चाहिए। आप सब जानते हैं कि मेरी कोई दुर्भावना नहीं थी। मैंने अंत:करण से क्षमा याचना की। कई बार की है। आज फिर कर रहा हूं। मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है कि मेरी छोटी से त्रुटि से ऐसा विवाद उत्पन्न हुआ। मुझे विश्वास है कि मेरी भावनाओं को सही संदर्भ में देखा जाएगा। भारतीय सेना के प्रति मेरे मन में सदैव सम्मान रहा है और रहेगा।'
शाह ने आगे कहा, 'सार्वजनिक जीवन में रहते हुए ऐसे शब्दों की मर्यादा, संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है। इस घटना से मैंने आत्ममंथन किया है। सबक लिया है। जिम्मेदारी मानता हूं। भविष्य में वाणी पर नियंत्रण रहेगा। ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। एक बार पुन: उस मामले में आप सभी नागरिकों से, भारतीय सेना से, सब लोगों से अंत:करण से माफी मांगता हूं।'
दरअसल, पीछले वर्ष 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था, 'उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।'
शाह ने आगे कहा, ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।'
बता दें कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क यह दिया जाएगा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है।