थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 मंगलवार को उड़ान के दौरान अचानक तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। इस दौरान विमान कुछ क्षणों के लिए तेजी से नीचे आया। जिसके चलते जोरदार झटके लगे और यात्रियों और केबिन क्रू में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, पायलट ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा और विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतार लिया। हादसे में यात्रियों और क्रू सदस्यों समेत 12 लोग घायल हुए हैं। इनमें से कुछ का एयरपोर्ट मेडिकल सेंटर में इलाज किया गया। जबकि, 7 घायलों को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। एयरलाइन के अनुसार, किसी भी यात्री के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। फिलहाल पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उड़ान के दौरान टर्बुलेंस कितना गंभीर था और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई।

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फ्लाइट में मौजूद एक यात्री ने बताया कि विमान ने उड़ान भरने के करीब डेढ़ घंटे बाद अचानक तेज झटके महसूस होने शुरू किए थे। उस वक्त सुबह का समय था और अधिकांश यात्री अपनी सीटों पर सो रहे थे। अचानक विमान बुरी तरह हिलने लगा और करीब दो से तीन मिनट तक ऊपर-नीचे तथा दाएं-बाएं झूलता रहा था। यात्री के अनुसार, इस दौरान कई लोग अपनी सीटों से उछल गए थे। उसका दावा है कि 15 से 20 लोगों को अपेक्षाकृत अधिक चोटें आई थी। जबकि, 70 से 80 प्रतिशत यात्रियों को मामूली चोटें लगी थी। विमान में 100 से अधिक यात्री सवार थे। घटना के बाद सामने आई विमान की तस्वीरों में केबिन की छत के कुछ पैनलों में दरारें भी दिखाई दी हैं। इन तस्वीरों के आधार पर विमान को हुए संभावित नुकसान की भी जांच की जा रही है।

टर्बुलेंस वह स्थिति होती है जब उड़ान के दौरान हवा का प्रवाह अचानक बदल जाता है। इससे विमान कुछ समय के लिए ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिलने लगता है और कई बार कुछ फीट तक नीचे भी आ सकता है। ऐसे समय यात्रियों को अक्सर महसूस होता है कि विमान गिर रहा है। जबकि, अधिकांश मामलों में यह सामान्य वायुगतिकीय स्थिति होती है और विमान सुरक्षित रहता है।

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टर्बुलेंस की तीव्रता अलग-अलग स्तर की हो सकती है। हल्के टर्बुलेंस में विमान में मामूली कंपन होता है और कई बार यात्रियों को इसका पता भी नहीं चलता। मध्यम टर्बुलेंस में विमान कुछ मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है। जिसकी वजह से केबिन में रखी चीजें गिर सकती हैं। गंभीर टर्बुलेंस की स्थिति में विमान में तेज झटके लगते हैं और यदि यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं बांधी हो तो वे अपनी सीट से उछल सकते हैं और घायल हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक यात्री विमान ऐसे बनाए जाते हैं कि वे सामान्य और गंभीर टर्बुलेंस का भी सामना कर सकें। पायलटों को भी खराब मौसम और टर्बुलेंस जैसी परिस्थितियों से सुरक्षित तरीके से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसलिए केवल टर्बुलेंस के कारण विमान दुर्घटना की आशंका बहुत कम होती है। हालांकि, यदि अत्यधिक खराब मौसम या अन्य तकनीकी परिस्थितियां भी साथ हों तो जोखिम बढ़ सकता है। 

दुनिया में टर्बुलेंस से जुड़े कुछ बड़े विमान हादसे भी दर्ज हैं। साल 1994 में अमेरिका की USAir फ्लाइट 1016 लैंडिंग के दौरान तूफानी मौसम से पैदा हुए टर्बुलेंस की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उस हादसे में 37 लोगों की मौत हुई थी। 1999 में अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 1420 खराब मौसम और टर्बुलेंस के बाद रनवे से फिसल गई थी। उस दौरान 11 लोगों की जान चली गई थी। वहीं, साल 2001 में अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 587 टेकऑफ के कुछ देर बाद वेक टर्बुलेंस का शिकार होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उस दुर्घटना में विमान में सवार सभी 260 लोगों की मौत हो गई थी।

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