पीएम की बात VS किसान की गुहार: मोदी करेंगे मन की बात तो थाली बजाएंगे किसान

पीएम मोदी के चलाए तरीके से ही उन तक अपनी आवाज़ पहुँचाने की तैयारी में किसान, किसान नेताओं की देश से अपील, रविवार सुबह 11 बजे जब पीएम करें मन की बात, तो थाली बजाए जनता

Updated: Dec 26, 2020, 11:04 PM IST

पीएम की बात VS किसान की गुहार:  मोदी करेंगे मन की बात तो थाली बजाएंगे किसान
Photo Courtesy : Fresspress Journal

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से ज्यादा समय से कड़कड़ाती ठंड में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपने विरोध प्रदर्शन को कई मायनों में अनोखा बना दिया है। किसान संगठन अब पीएम मोदी के चलाए तरीके से ही उन्हें अपनी आवाज़ बुलंदी के साथ सुनाने की तैयारी में हैं। किसान एकता मोर्चा ने देशवासियों से आह्वान किया है कि पीएम मोदी के मन की बात के प्रसारण के दौरान सभी देशवासी थाली बजाकर किसानों का समर्थन करें।

विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं के इस आह्वान के बाद कल देशभर में अद्भुत नजारा देखने को मिल सकता है। एक ओर जहां देश का प्रधानमंत्री अपने नियमित रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करेंगे वहीं देश के लोग खासकर किसान इस दौरान ताली, थाली, ढोल, नगाड़ा बजाकर प्रधानमंत्री के बातों का विरोध करेंगे और प्रतीकात्मक तौर से उनके आवाज को दबा अपनी आवाज को बुलंद करेंगे।

 

किसान नेता रजिंदर सिंह दीप ने कहा, 'इस आंदोलन में कई किसानों की जान अबतक जा चुकी है लेकिन देश के प्रधानमंत्री अब भी सिर्फ अपने मन की बात कर रहे हैं। लोगों के मन की बात और किसानों की तकलीफ वे सुनने को तैयार नहीं हैं। इसलिए, ऐसे ग़ैरजिम्मदार नेता जो देश के लोगों की मन की बात सुनना नहीं चाहते, उनके मन की बात भी किसी को नहीं सुननी चाहिए और उनकी आवाज हमारे संघर्ष की आवाज से दबा देनी चाहिए। आप सब से विनती है कि जब पीएम मन की बात करें तो आपके हाथ में जो भी चीज आए, बर्तन, थाली, नगाड़ा, ढोल उसे जोर से बजाइए और उनके मन की आवाज को हमारे संघर्ष की आवाज से दबाइए।'

 किसान नेता जगजीत सिंह डालेवल ने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री एक बार फिर मन की बात करने आ रहे हैं। हमारा सभी देशवासियों और देश के बाहर बैठे भारतीयों से भी अनुरोध है कि जिस समय पीएम मन की बात करेंगे उस समय उन्हें सुनने के बजाय एक बहुत बड़ा विरोध करना है और थालियां बजाना है। चूंकि, थालियां इन्हीं की चलाई हुई परंपरा है। वैसे आप चाहें तो थालियों की जगह ढोल-नगाड़े नगाड़े भी बजा सकते हैं।'