Opinion at Humsamvet In Hindi

अखबार दुरुस्त नहीं रहेंगे तो आजादी किस काम की: महात्मा गांधी

अखबार दुरुस्त नहीं रहेंगे तो आजादी किस काम की: महात्मा...

आज की परिस्थिति में मीडिया का जो स्वरूप हमारे सामने है वह वास्तव में बेहद अटपटा...

Cheetah is Back: इतिहास रच दिया, चिंता है इतिहास खुद को दोहराए नहीं 

Cheetah is Back: इतिहास रच दिया, चिंता है इतिहास खुद को...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर तीन चीतों को कूनो नेशनल पार्क...

भारत जोड़ो यात्रा: इस तेज दौड़ती दुनिया में धीमा सा एक सफर

भारत जोड़ो यात्रा: इस तेज दौड़ती दुनिया में धीमा सा एक सफर

कांग्रेस और राहुल गांधी ने लोकतंत्र वापसी के प्रयत्न में अगुआ बन परिस्थिति को बदलने...

चले चलो कि जहां तक ये आसमान चले: आज की अनिवार्यता है भारत जोड़ो यात्रा

चले चलो कि जहां तक ये आसमान चले: आज की अनिवार्यता है भारत...

‘‘चाहता हूँ मेरे देश का लगभग / बे पढ़ा - लिखा आदमी / मिटाए इस परिस्थिति को बढ़कर /...

बिल्किस बानो: अब तो शब्दकोश भी सुन्न पड़ गए हैं

बिल्किस बानो: अब तो शब्दकोश भी सुन्न पड़ गए हैं

बिल्किस बानो भारतीय गणतंत्र में व्याप्त असहिष्णुता का नवीनतम प्रतीक हैं। वे बदलाव...

75वाँ स्वतंत्रता दिवस: जागते हुए चेहरों पर भी हो खुशी, संगीत और दोस्ती

75वाँ स्वतंत्रता दिवस: जागते हुए चेहरों पर भी हो खुशी,...

14 अगस्त 1947 की आधी रात को ठीक 12 बजे पंडित नेहरु ने भारतीय संसद में एक ऐतिहासिक...

आज़ादी का अमृत महोत्सव और 9 अगस्त की प्रासंगिकता, मूल्यों से भटकता राष्ट्रीय नेतृत्व

आज़ादी का अमृत महोत्सव और 9 अगस्त की प्रासंगिकता, मूल्यों...

वर्तमान समय में जब हम आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, तब हमारे सामने आजादी...

आजाद भारत में बापू का पहला सन्देश: अब भुलाने का दौर

आजाद भारत में बापू का पहला सन्देश: अब भुलाने का दौर

तीन लेखों की श्रृंखला का पहला आलेख हम सबको यह विचार करना ही होगा कि भारतीय लोकतंत्र...

अशोक स्तंभ: यह पत्थरों पर उकेरी रेखाएं हैं, मोम पर नहीं

अशोक स्तंभ: यह पत्थरों पर उकेरी रेखाएं हैं, मोम पर नहीं

संविधान ने यदि तिरंगे और अशोक चक्र का निर्धारण राष्ट्रीय ध्वज के रूप में कर दिया...

लोकतंत्र का नया शाहगंज मॉडल, समरस का सियासी ढोंग

लोकतंत्र का नया शाहगंज मॉडल, समरस का सियासी ढोंग

शाहगंज मॉडल असल में लोकतंत्र का राजशाही स्वरूप है.. यह बहुत गंभीर प्रश्न है जो लोकतंत्र...

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