भोपाल। आजमगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में Gen Alpha अपने स्कूल को बचाने के लिए सड़क पर उतर आया है। यहां प्रायोगिक बहुउद्देशीय विद्यालय (DMS) के छात्रों ने अपने स्कूल का केंद्रीय विद्यालय (KV) में मर्जर किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि जिस स्कूल में शिक्षा के नए प्रयोग सबसे पहले किए जाते हैं, उसे सामान्य स्कूल में बदलने की तैयारी समझ से परे है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि DMS सिर्फ पढ़ाई कराने वाला स्कूल नहीं, बल्कि शिक्षा में नवाचार और प्रयोगों के लिए बनाई गई एक प्रयोगशाला है। शिक्षा की नई नीतियों और प्रयोगों को सबसे पहले यहां लागू किया जाता है, ताकि बच्चे बदलती शिक्षा व्यवस्था से अपडेट रहें। छात्रों का आरोप है कि केंद्रीय विद्यालयों में मर्जर के बाद स्कूल की यह विशेष पहचान खत्म हो जाएगी।
स्टूडेंट्स ने बताया कि सन 1965 से देश में चार प्रायोगिक बहुउद्देशीय विद्यालय भोपाल, अजमेर, मैसूरु और भुवनेश्वर में संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों को NCERT के अंतर्गत शिक्षा में नवाचार और शैक्षणिक प्रयोगों के लिए स्थापित किया गया था। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि DMS में नर्सरी से 12वीं तक पढ़ाई होती है और यहां गरीब परिवारों के बच्चे भी पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे अभिभावकों ने हमारा एडमिशन यहां इसलिए कराया क्योंकि इस स्कूल का दर्जा और व्यवस्था सामान्य स्कूलों से अलग है।
छात्रों ने सवाल उठाया कि जब DMS को शिक्षा में नए प्रयोगों की प्रयोगशाला के तौर पर विकसित किया गया है तो इसे सामान्य केंद्रीय विद्यालय क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने स्कूल के मर्जर का विरोध करते हुए कहा कि उनकी मांग नहीं मानी गई तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। स्टूडेंट्स ने इस दौरान स्कूल के प्राचार्य प्रोफेसर एसके गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर मर्जर का फैसला वापस लेने की मांग की।