इंदौर। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के तहत स्टूडेंट्स से संवाद कर रहे हैं। राहुल इंदौर में पहला और देश में 5वां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित कर रहे है। वे ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ विषय पर बात कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान कहा कि छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ गया है। सिस्टम स्टूडेंट्स नहीं बल्कि अंधभक्त बनाना चाहता है।
इस दौरान नर्सिंग की एक स्टूडेंट ने राहुल से कहा कि एमपी में हजारों नर्सिंग स्टूडेंट पर असर पड़ रहा है। सरकार को कोई मतलब नहीं है, वे हमारी बात सुनने नहीं आए। मैं उम्मीद से आई कि आप मेरी बात सुने। मैं मिडिल क्लास से हूं। फीस को लेकर पापा से कहा कि तो वे बोले कि इतनी ज्यादा फीस नहीं भर पाउंगा। इसके बाद मैंने काल सेंटर में नौकरी करके पैसे जोड़े। लेकिन विगत 6 वर्षों से मुझे डिग्री नहीं मिल पाई है।
राहुल के कार्यक्रम में एक MBBS छात्र ने मध्य प्रदेश में भर्तियों से जुड़ी समस्या बताते हुए कहा, 'पिछले 8 सालों से जितनी भी भर्तियां होती हैं, सब पर 13% होल्ड कर दिया जाता है। प्रीलिम्स हो जाती है, मेंस परीक्षा हो जाती है, इंटरव्यू भी हो जाता है, लेकिन सिलेक्शन के लिए 13% रोक देते हैं।' छात्र ने कहा, 'मेरे जैसे युवा कम से कम 4 लाख हैं और डायरेक्ट 87 हजार बच्चे होल्ड हैं। MBBS, व्यापम और जितनी भी परीक्षाएं होती हैं, सब पर 13% रोक लग जाती है। कोर्ट का बहाना देकर सरकार हर बार रोकती है। कोर्ट ने कई बार कमेंट किया कि आप अपना रिजल्ट क्यों नहीं देते? अपना ही कानून क्यों लागू नहीं करते।'
राहुल गांधी ने एक छात्रा से पूछा कि जो सिस्टम यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों को प्रोटेक्ट करने के लिए बना है, वही सिस्टम स्टूडेंट्स पर आक्रमण कर रहा है। इसके बारे में आप क्या सोचती हैं? इस पर छात्रा ने कहा कि यूनिवर्सिटीज बिल्कुल कोऑपरेट नहीं कर पा रही हैं। हर तरफ फर्जीवाड़ा चल रहा है। कहीं भी ट्रांसपेरेंसी नहीं है। हम चाहते हैं कि जो समस्याएं आपके सामने लेकर आए हैं, उनका अच्छा समाधान मिले और हमारी सारी समस्याएं दूर हों।
राहुल ने कहा कि सिस्टम के अंदर बैठे कुछ लोग भ्रष्ट हो जाते हैं। पैसे के चक्कर में पेपर लीक कर देते हैं और लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्ट लोग परीक्षा व्यवस्था में रहेंगे और परीक्षा प्रणाली ही भ्रष्ट होगी, तो इसका नुकसान बच्चों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर आज हम स्टूडेंट्स से बात करें तो वे खुश नहीं हैं। स्टूडेंट्स असहज हैं, उन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा और वे दबाव में हैं।