उज्जैन। महाकाल नगरी उज्जैन के अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में बच्चों की मौत का मामला गंभीर हो गया है। दरअसल, वहां, 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच महज डेढ़ महीने के भीतर 11 बच्चों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकांश 10 से 18 साल के उम्र वाले दिव्यांग बच्चे शामिल थे। सभी बच्चों को गंभीर हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल उज्जैन ले जाया गया था। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। कुछ बच्चों को अस्पताल मृत अवस्था में लाया गया था जबकि कुछ ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

मामले ने तूल तब पकड़ा जब पिछले एक साल में इसी आश्रम में कुल 17 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई। इस पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी किया। अदालत ने सभी से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही आश्रम की विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।

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अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर 2025 में 8 बच्चों की मौत दर्ज की गई थी। जबकि, जनवरी 2026 में अब तक 2 बच्चों की मौत हुई है। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम कराया गया। पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल के पोस्टमॉर्टम विभाग में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में किया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर के मुताबिक, बच्चों को बेहद गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। कई बच्चों में एनीमिया यानी खून की कमी प्रमुख कारण के रूप में सामने आई है।

अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में लगभग 250 दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल के अनुसार, इनमें से 50 से अधिक बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उनका कहना है कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होते हैं। कई बच्चे ऐसे हैं जो न तो स्वयं चल सकते हैं, न उठ बैठ सकते हैं और न ही अपने दम पर भोजन कर सकते हैं। संचालक का दावा है कि जिन बच्चों की मौत हुई हैं वे पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। इनमें सांस लेने में दिक्कत, एनीमिया और अन्य जटिल बीमारियां शामिल थीं।

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करीब डेढ़ साल पहले इंदौर स्थित युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामले के बाद प्रशासन ने उस आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में स्थानांतरित किया गया था। मृत बच्चों में अधिकांश उन्हीं में से बताए जा रहे हैं जिन्हें इंदौर से शिफ्ट किया गया था।