भारत की अध्यक्षता में इस साल आयोजित हो रही ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक 9 जून से इंदौर में शुरू होने जा रही है। 12 और 13 जून को होने वाली मंत्री स्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, कृषि सहयोग, जलवायु अनुकूल खेती और छोटे किसानों के सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करना है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ब्रिक्स की स्थापना साल 2006 में हुई थी और आज यह 11 सदस्य देशों तथा 10 साझेदार देशों का प्रभावशाली वैश्विक समूह बन चुका है। कृषि क्षेत्र में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस मंच पर लिए जाने वाले निर्णय वैश्विक खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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उन्होंने बताया कि भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। साल 2016 में भारत की अगुवाई में ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई थी। जिसने सदस्य देशों के बीच कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया था।
कृषि मंत्री के अनुसार, भारत की अध्यक्षता के दौरान कृषि कार्य समूह के अंतर्गत अब तक चार सत्रों में आठ बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन, पशुपालन और कृषि से जुड़े अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि नीतियों और नवाचारों के केंद्र में हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, उनकी बाजार तक पहुंच आसान बने और कृषि ऋण का प्रवाह बढ़े ताकि उनकी आय और आजीविका मजबूत हो सके।
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इस साल के सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि और सतत विकास तथा कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार और साझेदारी को मजबूत बनाना शामिल है। सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार के अवसरों का विस्तार करने और टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने पर भी चर्चा होगी।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुनर्योजी कृषि, टिकाऊ खेती की पद्धतियों और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को छोटे किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाना भी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से 12 जून को लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा विषय पर एक विशेष मंत्री स्तरीय संवाद आयोजित किया जाएगा।
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निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी। जबकि, 12 और 13 जून को कृषि मंत्रियों का मुख्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान खाद्य हानि को कम करने, पशुपालन, मत्स्य पालन, किसानों के अधिकारों और कृषि क्षेत्र की अन्य चुनौतियों पर भी व्यापक चर्चा की जाएगी। आयोजन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए एक विशेष ब्रिक्स वाटिका भी विकसित की जाएगी। इसमें सदस्य देशों के मंत्री और प्रतिनिधि सामूहिक वृक्षारोपण करेंगे जो प्रकृति संरक्षण और साझा पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा।
सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने के लिए इंदौर और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा। इसके तहत राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू जैसे प्रसिद्ध स्थलों को कार्यक्रम में शामिल किया गया है। कृषि मंत्री ने विश्वास जताया कि इंदौर में होने वाली यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच कृषि सहयोग को नई दिशा देगी और वैश्विक स्तर पर करोड़ों छोटे किसानों के हितों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।
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