भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चौसरा गांव में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना और भूमि उपयोग को लेकर चल रही चर्चाओं ने स्थानीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। लगभग 750 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कई वर्ष पहले अडानी समूह (पेंच थर्मल एनर्जी) की प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजना के लिए किया गया था। बाद में इस स्थल का उपयोग संभावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना के लिए किए जाने संबंधी चर्चाएं सामने आईं, जिसके चलते भूमि अधिग्रहण के लंबे समय से लंबित मुद्दों, स्थानीय विरोध-प्रदर्शनों तथा क्षेत्रीय राजनीतिक नेताओं के बयानों ने इस विषय को और अधिक चर्चा का केंद्र बना दिया है।

इसी प्रस्तावित परमाणु परियोजना को लेकर 6 अगस्त, हिरोशिमा दिवस के अवसर पर किसान संघर्ष समिति के बैनर तले बारह बिरहारी (छिंदवाड़ा) में एक जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस जनसुनवाई में मुंबई हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. जी. कोलसे पाटिल, पर्यावरणविद् सौम्य दत्ता, किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम एवं प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव, जन स्वास्थ्य अभियान (इंडिया) के अमुल्य निधि, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा सहित क्षेत्र के सैकड़ों महिला-पुरुषों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में प्रस्तावित परमाणु परियोजना का विरोध करते हुए इसे तत्काल निरस्त किए जाने की मांग की।

राजकुमार सिन्हा ने मंडला जिले में प्रस्तावित चुटका परमाणु परियोजना के खिलाफ वर्ष 2009 से आदिवासियों द्वारा चलाए जा रहे संघर्ष, जनआंदोलन और कानूनी लड़ाई का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी जैसी भयावह औद्योगिक दुर्घटना का दंश झेल चुके मध्यप्रदेश को इस प्रकार की खतरनाक परमाणु परियोजनाओं से दूर रहना चाहिए। विकास के नाम पर लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण को जोखिम में डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

इस दौरान पर्यावरणविद् सौम्य दत्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है, जबकि भारत में निजी कंपनियां इस क्षेत्र को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन के लिए सौर ऊर्जा सहित अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अधिक सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ विकल्प हैं।
जन स्वास्थ्य अभियान (इंडिया) के अमुल्य निधि ने परमाणु विकिरण के कारण मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाओं के दीर्घकालिक प्रभावों को गंभीरता से समझने और जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. जी. कोलसे पाटिल ने लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की सहमति और अधिकार सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार कार्पोरेट हितों को प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रही है।

वहीं, डॉ. सुनीलम ने मध्यप्रदेश में प्रस्तावित सभी परमाणु परियोजनाओं को लेकर भोपाल में एक व्यापक राज्यस्तरीय जनसुनवाई आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की आवाज एक साझा मंच पर सामने आ सके और सरकार के समक्ष जनमत स्पष्ट रूप से रखा जा सके।
एड आराधना भार्गव ने कहा कि माचागोरा बांध विस्थापितों की समस्याएं आज भी पूरी तरह हल नहीं हो सकी हैं। ऐसे में प्रस्तावित परमाणु परियोजना इस पूरे क्षेत्र के लिए एक नया और विनाशकारी संकट लेकर आएगी। इसलिए इस परियोजना के खिलाफ जनआंदोलन को और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनाया जाएगा।

जनसुनवाई में उपस्थित ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 10 अगस्त को न्यूक्लियर पावर प्लांट निरस्त करने और सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के 35 ग्रामों के दौरे की मांग को लेकर जेल भरो आंदोलन किया जायेगा। आगामी 15 अगस्त को क्षेत्र के दर्जनों गांवों की ग्राम सभाओं में प्रस्तावित परमाणु परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे, तथा सरकार को स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि स्थानीय समुदाय अपनी जल, जंगल, जमीन और आजीविका पर किसी भी प्रकार का संकट स्वीकार नहीं करेगा। वहीं, 17 अगस्त को विधायकों और सांसद को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

इस कार्यक्रम में बलराम पटेल, सज्जे पटेल, प्रकाश साहू, सुरेश वर्मा, आत्माराम पटेल, छिंगा वर्मा, बाबु पटेल, जय ईवनाती, कमला बाई चंद्रवंशी, सुशीला उईके, सरिता यादव सहित किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान, महिलाएं, युवा एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।