अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में इंदौर नारकोटिक्स टीम ने अवैध एमडी ड्रग (मेफेड्रोन) बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। चंदेरी थाना क्षेत्र के कड़राना गांव में चलाई जा रही इस यूनिट पर देर रात छापेमारी कर भारी मात्रा में ड्रग, केमिकल, हथियार और उपकरण जब्त किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, मौके से जब्त की गई मादक पदार्थ की कीमत लगभग 4 करोड़ आंकी गई है। 

नारकोटिक्स टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि कड़राना गांव में एक मकान से सिंथेटिक ड्रग मेफेड्रोन तैयार कर अवैध कारोबार चलाया जा रहा है। सूचना के आधार पर इंदौर से पहुंची करीब 15 सदस्यीय टीम ने सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे राघवेंद्र सिंह परमार के घर पर दबिश दी। छापेमारी के दौरान घर के भीतर ड्रग निर्माण की पूरी यूनिट का मिलना अधिकारियों के लिए चौंकाने वाला रहा।

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तलाशी के दौरान टीम ने करीब 1 किलो 282 ग्राम तैयार एमडी ड्रग और लगभग 2 किलो 570 ग्राम आधी तैयार ड्रग बरामद की। इसके अलावा करीब 45 किलो एमडी ड्रग बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल, लिक्विड पदार्थ और आधुनिक उपकरण भी जब्त किए गए। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद मादक पदार्थ और कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग चार करोड़ रुपए तक आंकी जा रही है। यह फैक्ट्री चंदेरी के जंगली इलाके के नजदीक चलाई जा रही थी जिससे इसकी गतिविधियां लंबे समय तक छिपी रही थी।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान 38 वर्षीय राघवेंद्र पुत्र बलराम सिंह परमार निवासी कड़राना और 31 वर्षीय प्रियांशु पुत्र सुनील जैन निवासी हाटका पुरा, चंदेरी के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रियांशु जैन स्थानीय स्तर पर उद्योग से जुड़ा हुआ था और हाल के समय में व्यापार में भारी नुकसान तथा कानूनी परेशानियों का सामना कर रहा था। बताया जा रहा है कि ड्रग निर्माण की यूनिट राघवेंद्र परमार के घर से चलाई जा रही थी।

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छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से एक लाइसेंसी पिस्टल, 15 जिंदा कारतूस और एक मैगजीन भी बरामद की गई है। इसके अलावा भोपाल आरटीओ नंबर की एक कार (MP 04 CU 5182) को भी जब्त किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी मेफेड्रोन बनाना ऑनलाइन माध्यम से सीखकर इस अवैध कारोबार में उतरे थे और ड्रग तैयार करने के लिए जरूरी केमिकल अक्सर इंदौर से लाते थे। केमिकल की लगातार खरीद और आवाजाही की सूचना मुखबिर के जरिए पुलिस तक पहुंची जिसके आधार पर यह पूरी कार्रवाई की गई।

मेफेड्रोन को आम बोलचाल में म्याऊं-म्याऊं के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बेहद खतरनाक सिंथेटिक नशीला पदार्थ है जिसका इस्तेमाल युवाओं और किशोरों के बीच तेजी से बढ़ रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तैयार ड्रग की सप्लाई किन शहरों और नेटवर्क के जरिए की जा रही थी तथा इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

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