अल नीनो का असर बढ़ने के संकेत, भारत सहित कई देशों में सूखा-बाढ़ का खतरा, केंद्र ने राज्यों को किया अलर्ट

WMO ने बड़ा अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि इस साल अल नीनो बनने की 80-90% संभावना है। इससे भारत में भयंकर सूखा, बाढ़ और हीटवेव का खतरा है।

Updated: Jun 03, 2026, 01:29 PM IST

यूनाइटेड नेशन्स की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वैश्विक जलवायु को लेकर नई चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि इस साल अल नीनो विकसित होने की संभावना तेजी से बढ़ रही है। संगठन के अनुसार, जून से अगस्त के बीच इसके बनने की संभावना करीब 80 प्रतिशत है। जबकि, नवंबर तक इसके बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकती है। इसके चलते भारत सहित कई देशों में सूखा, बाढ़, समुद्री और स्थलीय हीटवेव जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

भारत में भी मौसम को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश की संभावना जता चुका है। दक्षिण पश्चिम मानसून की प्रगति भी सामान्य से धीमी है और इसके 4 जून तक केरल पहुंचने का अनुमान है। जबकि, सामान्य तौर पर यह 1 जून के आसपास केरल में पहुंच जाता है।

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हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए अभी पूरी तरह निराशाजनक स्थिति नहीं है। WMO के अनुसार, यदि इंडियन ओशन डायपोल (IOD) और मैडेन जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO) सक्रिय बने रहते हैं तो वे अल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर सकते हैं। इंडियन ओशन डायपोल को हिंद महासागर का अल नीनो भी कहा जाता है। इसका सकारात्मक चरण भारत में बारिश को बढ़ावा देता है और सूखे की स्थिति को कमजोर कर सकता है। वहीं, मैडेन जूलियन ऑस्सिलेशन बादलों और हवाओं का एक वैश्विक चक्र है जो भूमध्य रेखा के आसपास घूमता रहता है। इसके भारत के ऊपर सक्रिय होने पर कमजोर मानसून के दौरान भी भारी बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।

अल नीनो को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रशांत महासागर की सतह के नीचे का पानी सामान्य से लगभग 6 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म पाया गया है। WMO के वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र में जमा यह अतिरिक्त ऊष्मा धीरे-धीरे सतह तक पहुंच रही है। जिसकी वजह से अल नीनो की स्थिति बनने और मजबूत होने की संभावना बढ़ रही है।

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दरअसल, अल नीनो तब विकसित होता है जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में चलने वाली समुद्री हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप दक्षिण अमेरिकी तट के पास समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म होने लगता है। यह गर्म पानी वैश्विक स्तर पर हवाओं और बादलों के पैटर्न को प्रभावित करता है। जिसकी वजह से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है।

संभावित खतरे को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने भी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सामान्य से कमजोर मानसून और अल नीनो की आशंका को ध्यान में रखते हुए जिलास्तर पर तैयारी की जाए। साथ ही किसानों तक मौसम और कृषि संबंधी जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल सेंटर सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

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WMO ने प्रभावित देशों की सरकारों, कृषि, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़े विभागों को भी पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। संगठन का कहना है कि समय रहते चेतावनी तंत्र और आपदा प्रबंधन योजनाओं को मजबूत कर संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। गौरतलब है कि साल 2023-24 का अल नीनो हाल के इतिहास के पांच सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल रहा था। इसके प्रभाव के कारण 2024 में वैश्विक तापमान ने कई रिकॉर्ड तोड़े थे।