मंडला। आदिवासी बहुल मंडला जिले के बीजाडांडी क्षेत्र में प्रसव पीड़ा से जूझ रही 28 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला के गर्भ में जुड़वा बच्चे थे। उनकी भी जान नहीं बच सकी। सलैया गांव की रहने वाली रुक्मणी नरेती को समय पर 108 जननी एंबुलेंस नहीं मिलने और गांव से अस्पताल तक खराब सड़क के कारण हुई देरी का सामना करना पड़ा। परिजनों ने इन परिस्थितियों को तीनों मौतों की वजह बताया है।
रुक्मणी के पति प्रीतम नरेती के मुताबिक, बुधवार शाम करीब 4 बजे उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। उन्होंने तत्काल 108 जननी एंबुलेंस के लिए फोन किया लेकिन उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई। इसके बाद परिवार ने निजी वाहन की व्यवस्था की और रुक्मणी को अस्पताल ले जाने के लिए रवाना हुआ।
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परिजनों के अनुसार, सलैया गांव तक पहुंचने वाला रास्ता खराब होने के कारण निजी वाहन को धीमी गति से चलना पड़ा था। करीब 5:10 बजे रुक्मणी को बीजाडांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। चिकित्सा टीम ने जांच के बाद शाम 5:25 बजे उसे मृत घोषित कर दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अक्षय हरदाह ने बताया कि रुक्मणी पहले से सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी। अस्पताल पहुंचने पर उसकी जांच की गई लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को भी दी गई।
डॉ. हरदाह के मुताबिक, रुक्मणी नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल आती थी। उसे समय-समय पर जिला अस्पताल मंडला और मेडिकल कॉलेज जबलपुर भी रेफर किया गया था। सोनोग्राफी के दौरान उसके गर्भ में जुड़वा बच्चों की पुष्टि हुई थी।
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अस्पताल में जांच के समय दोनों बच्चों में सांस और हृदय गति नहीं मिली। चिकित्सकों के अनुसार, दोनों की गर्भ में ही मौत हो चुकी थी। इस तरह प्रसव से पहले ही रुक्मणी और उसके दोनों अजन्मे बच्चों की जान चली गई।
घटना के बाद परिवार ने समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो महिला को बेहतर और जल्दी चिकित्सा सुविधा मिल सकती थी। खराब सड़क के कारण निजी वाहन से अस्पताल पहुंचने में भी अतिरिक्त समय लगा।
चिकित्सा अधिकारी डॉ. अक्षय हरदाह ने बताया कि 108 एंबुलेंस का संचालन और वाहनों का आवंटन सीधे भोपाल स्तर से होता है। उनके अनुसार, 108 पर कॉल किए जाने के बाद एंबुलेंस भेजने की प्रक्रिया में स्थानीय अस्पताल की कोई भूमिका या नियंत्रण नहीं रहता।
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