कर्नाटक में बीजेपी सरकार की रिश्वतखोरी के खिलाफ कॉन्ट्रैक्टर्स ने खोला मोर्चा, बेंगलुरु में आज बड़ा प्रदर्शन

पिछले 8-10 महीनों से कर्नाटक में रिश्वत लेने और सरकारी सिस्टम में करप्शन बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन का दावा है कि सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए 40% तक रिश्वत देनी पड़ रही है।

Updated: Jan 18, 2023, 09:39 AM IST

कर्नाटक में बीजेपी सरकार की रिश्वतखोरी के खिलाफ कॉन्ट्रैक्टर्स ने खोला मोर्चा, बेंगलुरु में आज बड़ा प्रदर्शन

बेंगलुरु। कर्नाटक में चुनाव से पहले सरकारी करप्शन का मुद्दा फिर गरमा गया है। सत्ताधारी दल बीजेपी के लिए रिश्वतखोरी मुसीबत बनता दिख रहा है। राज्यभर के कॉन्ट्रैक्टर्स बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को सरकार की रिश्वतखोरी के खिलाफ राजधानी बेंगलुरु में कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन बड़ा प्रदर्शन करने वाले हैं।

कर्नाटक दक्षिण भारत का इकलौता राज्य है, जहां BJP सत्ता में है। यहां अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। इससे पहले सरकारी भ्रष्टाचार का मुद्दा गर्म है। पिछले 8-10 महीनों से कर्नाटक में रिश्वत लेने और सरकारी सिस्टम में करप्शन बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। 16 जनवरी को स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए अधिकारियों-मंत्रियों और विधायकों को 40% तक रिश्वत देनी पड़ रही है।

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कर्नाटक कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डी केम्पन्ना ने बताया कि सच उजागर करने के बाद हममें से कई लोगों को धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि, 'रिश्वत पहले भी देनी पड़ती थी। लेकिन पहले 5 से 10 परसेंट रिश्वत ली जाती थी। 2019 में BJP जब सरकर में आई तो ये अमाउंट बढ़कर 40% तक पहुंच गया है। 40% रिश्वत दे देंगे तो फिर काम कैसे करेंगे?'

डी केम्पन्ना ने कहा, 'हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं, लेकिन उन्होंने भी कोई एक्शन नहीं लिया। हमारे साथ 1 लाख कॉन्ट्रैक्टर्स हैं। बीते तीन साल में उनके 25 हजार करोड़ रुपए अटके हैं। आज हम बेंगलुरू में बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी में तय किया जाएगा कि आंदोलन को कैसे आगे बढ़ाना है।' 

बता दें कि कर्नाटक में बीते एक साल में 3 कॉन्ट्रैक्टर सुसाइड कर चुके हैं। पिछले महीने ही टीएन प्रसाद नाम के कॉन्ट्रैक्टर ने सुसाइड किया। उन्हें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 16 करोड़ रुपए की एक स्कीम पर काम करना था। टीएन प्रसाद ने काम के लिए बैंक से लोन लिया था, लेकिन सरकारी बिल क्लियर नहीं हो रहे थे। आरोप है कि इसी दवाब में उन्होंने आत्महत्या कर ली।

सिविल कॉन्ट्रैक्टर संतोष पाटिल ने 11 अप्रैल 2022 को खुदकुशी की थी। यह मुद्दा देशभर में सुर्खियों में था। उन्होंने ही 40 फीसदी रिश्वत का खुलासा किया था। पाटिल ने अपने दोस्त को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजकर कहा था कि, 'बीजेपी नेता व पूर्व मंत्री ईश्वरप्पा मेरी मौत के जिम्मेदार हैं। उसे सजा मिलनी चाहिए। मैंने अपनी सभी इच्छाओं को छोड़कर यह कदम उठाने का मन बनाया है। मेरी PM, CM और येदियुरप्पा से गुजारिश है कि वे मेरे परिवार का ख्याल रखें।'

पाटिल ने सुसाइड से पहले कई बार BJP के सीनियर नेता और तब ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री रहे ईश्वरप्पा को भ्रष्ट बताया था और उनकी शिकायत PM नरेंद्र मोदी से भी की थी। बाद में ईश्वरप्पा के खिलाफ FIR हुई और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन के वर्किंग प्रेसिडेंट मंजूनाथ कहते हैं कि आज कर्नाटक पूरे देश में सबसे ज्यादा भ्रष्ट राज्य बन गया है।

कर्नाटक के सीनियर जर्नलिस्ट अशोक चंदारगी कहते हैं कि, 'ये सच है कि लोग एडमिनिस्ट्रेशन के करप्शन से परेशान है। जैसे, ट्रांसफर में ही बिना लेनदेन के किसी का काम नहीं हो रहा है। BJP कर्नाटक में अब तक तीन सर्वे करवा चुकी है, इसमें उसे 60 से 75 सीटें मिल रही हैं। मुख्यमंत्री दिल्ली गए थे, तो खुद कह रहे हैं कि 106 सीटें जीतेंगे, जबकि बहुमत के लिए 113 सीटें चाहिए। BJP के लिए इस बार सरकार बचाना बड़ी चुनौती है।’