जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी बांध में हुए चर्चित क्रूज हादसे का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। भोपाल निवासी कमल कुमार राठी ने जबलपुर मुख्यपीठ में जनहित याचिका दाखिल कर इस घटना को गंभीर प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी लापरवाही का परिणाम बताया है। याचिका में हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों पर आपराधिक कार्रवाई करने, राज्यभर में संचालित क्रूज और वाटर स्पोर्ट्स सेवाओं का सुरक्षा ऑडिट कराने तथा जांच पूरी होने तक सभी क्रूज सेवाएं बंद करने की मांग की गई है।
याचिका के अनुसार, बीते 30 अप्रैल को बरगी बांध में नर्मदा क्रूज तेज आंधी और ऊंची लहरों के बीच अनियंत्रित होकर पलट गई थी। इस हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टी हो चुकी है। जबकि, हादसे में कई यात्री घायल हुए। पिटीशन में दावा किया गया है कि क्रूज में तय क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया गया था। जानकारी के मुताबिक, नाव में 43 से 47 लोग सवार थे। जबकि, आधिकारिक तौर पर केवल 29 टिकट जारी किए गए थे।
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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि मौसम विभाग ने 29 अप्रैल को ही खराब मौसम और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी कर दी थी। बावजूद इसके क्रूज संचालन जारी रखा गया। आरोप है कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर लापरवाही बरती गई। यात्रा शुरू होने से पहले किसी को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। याचिका में एक महिला यात्री का हवाला देते हुए कहा गया है कि जब नाव में पानी भरना शुरू हुआ तब घबराहट के बीच जल्दबाजी में लाइफ जैकेट बांटी गई।
जनहित याचिका में राज्य सरकार, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड, इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI), जबलपुर कलेक्टर और एसपी समेत कुल 8 पक्षकारों को शामिल किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह हादसा अंतर्देशीय पोत अधिनियम-2021और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की वर्ष 2017 की बोट सेफ्टी गाइडलाइंस के स्पष्ट उल्लंघन का नतीजा है।
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पिटीशन में यह भी उल्लेख किया गया है कि बरगी बांध का क्षेत्र वेटलैंड श्रेणी में आता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने साल 2023 में ऐसे इलाकों में मोटर चालित क्रूज संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। बाद में इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। इसके बावजूद यहां व्यावसायिक क्रूज संचालन जारी रखा गया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि प्रदेश के सभी जल पर्यटन स्थलों पर चल रही क्रूज, हाउस बोट और मोटर बोट सेवाओं का व्यापक सुरक्षा परीक्षण कराया जाए। साथ ही राज्य स्तर पर सख्त सुरक्षा नियम लागू कर संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।