अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने सूचना और संचार पर नियंत्रण पर कड़ाई करते हुए सरकारी कर्मचारियों, तालिबान सदस्यों तथा कई सरकारी संस्थानों में स्मार्टफोन के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिया है। सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के निर्देश के बाद 17 जून से यह आदेश प्रभावी किया गया। इसके तहत सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नौकरी से निष्कासन, कानूनी कार्रवाई और कुछ क्षेत्रों में जेल की सजा तक हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह एक आधिकारिक पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया था जिस पर अफगानिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का प्रतीक चिह्न अंकित था। पत्र में देशभर के विभागीय प्रमुखों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने अधीन कार्यरत सभी वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों को स्मार्टफोन के पूर्ण प्रतिबंध की जानकारी दे। आदेश सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के सरकारी विभागों पर लागू बताया गया है। किसी भी प्रकार की छूट केवल सर्वोच्च नेता की विशेष अनुमति से ही दी जा सकेगी।
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इस फैसले का असर सरकारी कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है। कई कर्मचारियों का कहना है कि वे रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों, व्हाट्सऐप संदेशों, ईमेल संचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल टूल्स के जरिए काम करते थे। ऐसे में स्मार्टफोन प्रतिबंध से कार्य निष्पादन की गति प्रभावित हो सकती है। अफगानिस्तान के दूरदराज प्रांत बदख्शान के कुछ सरकारी कर्मचारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि नियमों के उल्लंघन पर छह महीने तक की जेल का खतरा होने की चर्चा है। जिसकी वजह से कर्मचारियों में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने 7 जून को हुई एक बैठक में मौखिक रूप से यह निर्देश जारी किया था। इसके बाद सैन्य अदालतों और प्रशासनिक इकाइयों को आदेश के पालन संबंधी निर्देश भेजे गए। कुछ प्रांतों में तालिबान सदस्यों द्वारा अपने स्मार्टफोन नष्ट करने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। जिन्हें आदेश के प्रति वफादारी के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
स्मार्टफोन प्रतिबंध अब केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है। पांजशीर प्रांत में शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। जबकि, घोर प्रांत में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और प्रशासनिक कार्यालयों में इसी प्रकार के प्रतिबंध लागू किए हैं। कंधार, मैदान वर्धक और अन्य इलाकों में भी ऐसे निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
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विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम तालिबान की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत सूचना के प्रवाह, सामाजिक गतिविधियों और सार्वजनिक जीवन पर नियंत्रण लगातार बढ़ाया जा रहा है। अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक उपस्थिति पर कई कठोर प्रतिबंध लगाए हैं। लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर रोक, विश्वविद्यालयों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध, बिना पुरुष अभिभावक के यात्रा करने पर सीमाएं तथा सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए कड़े नियम पहले ही लागू किए जा चुके हैं।
मीडिया और इंटरनेट के क्षेत्र में भी तालिबान सरकार ने कई नियंत्रणात्मक कदम उठाए हैं। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। जबकि, टीवी प्रसारण और दृश्य सामग्री को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। महिलाओं द्वारा लिखी गई कई पुस्तकों को पाठ्यक्रमों से हटाया गया है और विश्वविद्यालयों में लोकतंत्र, मानवाधिकार तथा महिलाओं से जुड़े अनेक विषयों के अध्ययन पर रोक लगाई गई है।
इसके अलावा संगीत, नाटक, रोमांटिक साहित्य और शतरंज जैसे खेलों पर भी विभिन्न स्तरों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। महिलाओं की तस्वीरों के सार्वजनिक प्रदर्शन और कुछ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी सीमित किया गया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन फैसलों ने अफगानिस्तान में नागरिक स्वतंत्रताओं और व्यक्तिगत अधिकारों को और कमजोर किया है। नए स्मार्टफोन प्रतिबंध को तालिबान के अब तक के सबसे व्यापक डिजिटल नियंत्रण उपायों में से एक माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इससे न केवल सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता प्रभावित होगी बल्कि देश में सूचना तक पहुंच और संचार के साधनों पर भी पहले से अधिक नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।
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