सूरत। गुजरात की राजनीति में सहकारी क्षेत्र से BJP के लिए बड़ा झटका सामने आया है। राज्य की सबसे बड़ी सहकारी चीनी फैक्ट्रियों में शामिल बारडोली शुगर फैक्ट्री के चुनाव में किसानों के पैनल ने BJP समर्थित पैनल का सफाया कर दिया है। किसान परिवर्तन पैनल ने 15 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज कर सहकारी संस्था पर BJP के करीब 20 साल पुराने नियंत्रण को खत्म कर दिया।
16 अगस्त को हुए चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित किए गए। BJP समर्थित सहकार पैनल को सिर्फ एक सीट मिली, जबकि बाकी 14 सीटों पर किसान परिवर्तन पैनल के उम्मीदवार विजयी रहे। खास बात यह रही कि BJP के बारडोली विधायक ईश्वर परमार भी चुनाव हार गए।
परमार को किसान परिवर्तन पैनल के तरुणकुमार वाघेला ने 542 वोटों के अंतर से हराया। वाघेला को 1,424 वोट मिले, जबकि BJP विधायक परमार को 882 वोट ही हासिल हुए। वाघेला इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बारडोली सीट से परमार के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं।
बारडोली शुगर फैक्ट्री की स्थापना 1955 में हुई थी। करीब 600 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाली यह संस्था गुजरात की पहली सहकारी चीनी फैक्ट्री है और एशिया की बड़ी सहकारी चीनी फैक्ट्रियों में भी गिनी जाती है।
किसान पैनल के नेताओं ने जीत के बाद कहा कि किसानों ने सहकारी क्षेत्र में राजनीति के बढ़ते दखल के खिलाफ मतदान किया है। गन्ना किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलने और गन्ने की पेराई के बाद भुगतान में देरी जैसे मुद्दों को भी चुनाव में प्रमुखता से उठाया था।
बारडोली शुगर फैक्ट्री पर BJP के लंबे समय से चले आ रहे नियंत्रण को देखते हुए यह नतीजा गुजरात के सहकारी क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब सहकारी संस्थाएं गुजरात की ग्रामीण राजनीति में मजबूत राजनीतिक प्रभाव का केंद्र रही हैं।