JDU: लव जिहाद के नाम पर नफ़रत फैलाई जा रही, हम ऐसे कानूनों के हक में नहीं

जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी शादी के लिए धर्म परिवर्तन रोकने वाले क़ानूनों के पक्ष में नहीं है, ऐसे क़ानून समाज को बांटने और नफ़रत को बढ़ावा देने का काम करते हैं

Updated: Dec 28, 2020, 06:21 PM IST

JDU: लव जिहाद के नाम पर नफ़रत फैलाई जा रही, हम ऐसे कानूनों के हक में नहीं
Photo Courtesy: Indian Express

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने कथित लव जिहाद के मुद्दे पर बीजेपी से बिलकुल अलग लाइन ले ली है। पटना में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी ने पत्रकारों से कहा कि उनका दल लव जिहाद रोकने के नाम पर बनाए जा रहे उन क़ानूनों के पक्ष में नहीं है, जिनके जरिए शादी के लिए धर्म परिवर्तन पर पाबंदी लगाई जा रही है। अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक त्यागी ने कहा कि समाज में लव जिहाद के नाम पर नफ़रत और विभाजनकारी सोच को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है, जो ठीक नहीं है।

केसी त्यागी ने कहा कि हमारा संविधान और सीआरपीसी के प्रावधान भी धर्म, जाति और क्षेत्र के आधार पर कोई फ़र्क़ किए बिना दो बालिग नागरिकों को अपना जीवनसाथी चुनने की आज़ादी देते हैं। जेडीयू महासचिव ने कहा कि समाजवादी विचारधारा के लोग डॉ. राम मनोहर लोहिया के ज़माने से धर्म, जाति और नस्ल की परवाह किए बिना बालिग़ नागरिकों के अपनी मर्ज़ी से जीवनसाथी चुनने के अधिकार की वकालत करते आए हैं।

बीजेपी की राज्य सरकारों के लिए लव जिहाद सबसे बड़ा मुद्दा है

जेडीयू ने यह बात ऐसे वक़्त में कही है, जब देश भर में बीजेपी की अगुवाई वाली राज्य सरकारों के बीच कथित लव जिहाद रोकने के नाम पर सख़्त सज़ा देने वाले क़ानून लाने की होड़ सी मची है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार तो अध्यादेश के ज़रिए ऐसा क़ानून लागू भी कर चुकी है। जबकि मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत बीजेपी शासित अन्य राज्यों में ऐसे क़ानून लाने की तैयारी ज़ोरशोर से चल रही है। इतना ही नहीं, पिछले कुछ महीनों के दौरान इन राज्यों के बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने कथित लव-जिहाद रोकने को अपना सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बना रखा है। मध्य प्रदेश में तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट ने इसी शनिवार को ऐसे क़ानून को मंज़ूरी दे दी है और अब विधानसभा का सत्र स्थगित होने के बाद अध्यादेश लाकर इसे लागू किए जाने की ख़बरें भी आ रही हैं।

लेकिन जेडीयू का साफतौर पर कहना है कि ऐसे क़ानून समाज को बाँटने और लोगों के बीच नफ़रत फैलाने का काम करते हैं लिहाज़ा वो इनका समर्थन नहीं करती। उत्तर प्रदेश में लाए गए ऐसे अध्यादेश के ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिस पर 7 जनवरी को सुनवाई होनी है।

अरुणाचल में अपने विधायकों को तोड़ने से भी खफा है जेडीयू

जेडीयू ने रविवार की अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद सिर्फ़ लव जिहाद के मसले पर ही बीजेपी से अलग लाइन नहीं ली है। उसने अरुणाचल प्रदेश में अपने सात में से छह विधायकों को बीजेपी में शामिल कराए जाने पर भी कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की है। जेडीयू ने कहा है कि बीजेपी ने जिस तरह अपनी सहयोगी पार्टी के विधायकों को तोड़ा है, वो गठबंधन धर्म के ख़िलाफ़ है। हालाँकि इसके साथ ही जेडीयू ने यह भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश की घटनाओं का असर बिहार पर नहीं पड़ेगा, लेकिन इस बारे में दिए गए जेडीयू के बयानों में जिस तरह की तल्ख़ी नज़र आई वो बिहार में सरकार चला रहे एनडीए गठबंधन के लिए अच्छा संकेत नहीं है।