भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बड़ी लापरवाही, जीवित नवजात को डॉक्टरों ने घोषित कर दिया मृत

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों ने एक प्रीमैच्योर नवजात को मृत बताकर डेथ सर्टिफिकेट थमा दिया। अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच 4 घंटे बाद पिता को बच्ची की सांसें चलती मिलीं।

Updated: Mar 19, 2026, 04:31 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां समय से पहले जन्मी एक नवजात बच्ची को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर मृत्यु प्रमाण पत्र तक जारी कर दिया था लेकिन करीब चार घंटे बाद वही बच्ची जीवित अवस्था में पाई गई। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, रायसेन जिले के बरेली निवासी परवेज अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां से उन्हें रायसेन जिला अस्पताल और फिर हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया था। महिला की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे तुरंत भर्ती कर प्रसव कराया गया। गर्भावस्था करीब 5 से 6 महीने की थी और जन्मी बच्ची का वजन मात्र 450 ग्राम था।

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डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के समय नवजात में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी और स्टेथोस्कोप से जांच में हार्टबीट नहीं मिली थी। प्रोटोकॉल के तहत शिशु को एनआईसीयू भेजा गया लेकिन कुछ समय बाद परिजनों को बताया गया कि बच्ची की मौत हो चुकी है। रात करीब 12 बजे परिवार को मृत्यु प्रमाण पत्र भी सौंप दिया गया जिसमें मौत का समय शाम लगभग 8:30 बजे दर्ज किया गया था।

परिवार इस बीच अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गया और कफन तक खरीद लिया था। हालांकि, जब पिता परवेज रात में एनआईसीयू पहुंचे तो उन्होंने बच्ची के शरीर में हलचल और सांस चलने जैसी गतिविधि देखी। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया जिसमें बच्ची का पेट हिलता नजर आया। इसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद डॉक्टरों से सवाल उठाए।

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परिजनों का आरोप है कि जवाब मांगने पर उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई और वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की गई। यहां तक कि बच्ची के परिजनों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस आरोप पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है लेकिन वरिष्ठ डॉक्टरों ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।

डॉक्टरों का पक्ष है कि यह मामला अत्यंत प्रीमैच्योर डिलीवरी का था जिसे चिकित्सकीय भाषा में एबॉर्टस कहा जाता है। ऐसे मामलों में भ्रूण का विकास अधूरा होता है और जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभी जन्म के बाद हलचल दिखाई दे सकती है लेकिन इसे जीवित होने का संकेत नहीं माना जाता।

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इसके साथ ही डॉक्टरों ने यह भी माना कि नवजात को पर्याप्त समय तक निगरानी में नहीं रखा गया जिससे भ्रम की स्थिति बनी। उनका कहना है कि यदि कुछ और समय तक ऑब्जर्वेशन किया जाता तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती थी। वहीं, गर्भवती महिला को समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने को भी स्थिति बिगड़ने की एक वजह बताया गया है।