सांप्रदायिक कटुता समाज और देश के लिए नुकसानदेह, राज्यसभा में बोले दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने कहा कि आज इस देश में जिस प्रकार से सांप्रदायिक कटुता बढ़ती जा रही है। मनमुटाव बढ़ता जा रहा है। यह देश के लिए उचित नहीं है।

Updated: Mar 18, 2026, 04:38 PM IST

नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को अप्रैल से जुलाई के बीच राज्यसभा से रिटायर हो रहे 59 सांसदों को विदाई दी गई। इनमें पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, शरद पवार, सभापति हरिवंश, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, आरपीआई नेता रामदास आठवले शामिल हैं। इनमें कई नेता ऐसे भी है जो फिर से राज्यसभा आएंगे। इस दौरान कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संसद को संबोधित करते हुए देश में फैल रहे सांप्रदायिक कटुता को लेकर चिंता जाहिर की।

दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण में कहा कि लोगों को इस बात का आश्चर्य होगा कि छात्र जीवन में मेरा राजनीति से कोई वास्ता नहीं रहा। लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनी कि मैं 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष बन गया। 30 साल की उम्र में विधायक बन गया। 33 साल में मंत्री बन गया, सांसद और फिर 40 साल में मुख्यमंत्री बन गया। लेकिन मैं हमेशा अपनी विचारधारा के मार्ग पर चला हूं। मैंने अपने विचारधारा के साथ कभी समझौता नहीं किया। 
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी किसी के लिए कटुता नहीं पाली। कई बार मतभेद होते थे। और विचारधारा में मतभेद होंगे। लेकिन मनभेद होने की मैने कभी मौका नहीं दिया। आज भी मेरा आपसे अनुरोध है कि हो सकता है कि मेरे भाषण में कई बार कटुता आई हो। किसी को बुरा लगा हो जिसके लिए मैं क्षमापार्थी हूं। चाहे विधानसभा मध्य प्रदेश में हो चाहे लोकसभा में हो चाहे यहां हो। मेरे संबंध उन लोगों के साथ अच्छे रहे हैं जिनके विचारधारा के साथ ना मैं कभी सहमत था, ना हूं और ना रहूंगा। 

दिग्विजय सिंह ने वामपंथी विचारधारा के नेताओं को लेकर कहा कि जहां तक कॉमरेड्स का सवाल है उनके कार्यसंचालन में कुछ बात हो सकती है। लेकिन इनकी जो गरीबों के पक्ष में जो विचारधारा रही है उसका मैने समर्थन किया है। सिंह ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं उस लोकसभा में भी रहा जिसमें जिसमें अटल जी, राजीव गांधी जी और चंद्रशेखर जी हुआ करते थे। इंदिरा जी ने मुझे कांग्रेस में प्रवेश दिया। इन लोगों से प्रभावित होकर ही मैंने अपना राजनीतिक सफर पूरा किया है।

सिंह ने सभापति से कहा कि मैं कभी भी सदन में जो डिसटर्बेंस होते हैं मैं उसके पक्ष में नहीं रहा हूं। लोकतंत्र की बुनियाद है चर्चा और सदन में सत्ता पक्ष की यह जिम्मेदारी होती है कि विपक्ष के साथ चर्चा के बाद कोई रास्ता निकाले। इस सदन में हमारे अंसारी साहब भी अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने कोई भी बिल दिन में पास होने का मौका नहीं दिया है। रास्ता निकलता है और निकलना चाहिए। यही बुनियाद है लोकतंत्र की जिसमें आज कमी देखने को मिली है। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा, 'आज इस देश में जिस प्रकार से सांप्रदायिक कटुता बढ़ती जा रही है। मनमुटाव बढ़ता जा रहा है। यह देश के लिए उचित नहीं है। ना हमारे संस्कार और संस्कृति के प्रति उचित है। यह लोकतंत्र, संविधान, समाज और इस देश के लिए भी उचित नहीं है।'

सिंह ने कहा कि मैंने अपने राजनैतिक जीवन में अपना रास्ता खुद तय किया है और मैं आभारी हूं कांग्रेस पार्टी का जिन्होंने मुझे हर सदन में आने का मौका दिया। आज इस अवसर पर मुझे अटल जी की वो बात याद आती है कि "ना मैं टायर्ड हूं ना ही मैं रिटायर्ड हूं।" सिंह ने कहा कि आगे चलकर हम और भी काम करेंगे लेकिन इस समय मैं उन सभी माननीय सदस्यों के प्रति आभार वयक्त करता हूं जिन्होंने मेरे लिए अच्छे शब्दों का प्रयोग किया। और मैं विश्वास दिलाता हूं कि मैं अपने राजनैतिक जीवन में जैसा कबीर कह गए हैं कि "कबीरा खड़ा बाजार में, सबकी मांगे खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर"।