इंदौर के पूर्व विधायक अश्विनी जोशी का 66 वर्ष की आयु में निधन, हार्ट अटैक आने से हुई मौत

इंदौर विधानसभा क्षेत्र-3 से तीन बार विधायक रहे कांग्रेस नेता अश्विनी जोशी का शुक्रवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

Updated: May 08, 2026, 01:11 PM IST

इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अश्विनी जोशी का शुक्रवार सुबह 66 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवार के मुताबिक, वे पिछले कुछ समय से सांस संबंधी परेशानी और पैरों की बीमारी से जूझ रहे थे तथा उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार सुबह उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। जिसके बाद परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

परिजनों के अनुसार सुबह करीब 8 बजे अश्विनी जोशी की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें तुरंत शिल्बी हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां डॉक्टर अजय पारिख की टीम ने उनका इलाज किया। डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए लेकिन उनका हार्ट रिकवर नहीं हो पाया और उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया गया है कि उनका बेटा फिलहाल विदेश में है इसलिए उसके इंदौर पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अश्विनी जोशी कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री महेश जोशी के भतीजे थे। जोशी परिवार का इंदौर की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। अश्विनी जोशी ने इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 का तीन बार प्रतिनिधित्व किया था। वे अपनी बेबाक शैली और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने के लिए पहचाने जाते थे। राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने संगठन और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई थी।

उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। छात्रसंघ चुनावों से सक्रिय राजनीति में आए जोशी बाद में कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता था। दिग्विजय सिंह सरकार के दौर में राजनीतिक हलकों में उन्हें शैडो सीएम तक कहा जाता था।

अश्विनी जोशी का नाम साल 2006 के चर्चित पार्षद गोलीकांड मामले में भी सामने आया था। कांग्रेस पार्षद मुन्ना अंसारी ने उन पर गोली चलाने का आरोप लगाया था। यह घटना सुयश अस्पताल के पास हुई थी। इस हमले में अंसारी घायल हो गए थे। हालांकि, इस मामले में अदालत ने साल 2024 में करीब 18 साल बाद अश्विनी जोशी समेत चार आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि गोली उन्होंने चलाई थी। मामले में न तो हथियार बरामद हुआ और न ही गोली जब्त की जा सकी थी।