इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद अब जबलपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। शहर के उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र के राजीव गांधी वार्ड में बुधवार सुबह लोगों के घरों में नलों से काला, कीचड़युक्त और तेज दुर्गंध वाला पानी आने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तत्काल जांच, पाइपलाइन की मरम्मत और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो जलजनित बीमारियों का खतरा गंभीर रूप ले सकता है।

बुधवार सुबह जब लोगों ने रोजमर्रा के उपयोग और पीने के लिए नल खोले तो साफ पानी की जगह काले रंग का बदबूदार पानी निकलने लगा। शुरुआत में लोगों ने इसे बारिश का असर मानकर कुछ देर इंतजार किया लेकिन करीब 10 से 15 मिनट तक लगातार गंदा पानी आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद स्थानीय निवासियों ने आसपास की जलापूर्ति व्यवस्था और पाइपलाइन की स्थिति पर सवाल उठाए।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेयजल की पाइपलाइन नाले के भीतर से होकर गुजरती है। उनका कहना है कि पाइपलाइन में कहीं लीकेज या क्षति होने के कारण नाले का दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल रहा है। जिसकी वजह से गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है। लोगों ने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और दोष दूर करने की मांग की है।

घटना के बाद कई लोगों ने नलों से निकल रहे काले पानी के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि नागरिकों से नियमित रूप से टैक्स वसूला जाता है लेकिन बदले में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने क्षेत्र के विधायक और नगर निगम अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने और समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

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क्षेत्र के निवासियों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से वार्ड में बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं। पहले बीमारी के कारण स्पष्ट नहीं थे लेकिन अब दूषित पानी सामने आने के बाद लोगों को आशंका है कि लगातार हो रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के पीछे यही पानी जिम्मेदार हो सकता है। राजीव गांधी वार्ड निवासी विजय नायडू ने बताया कि बुधवार सुबह उन्होंने मोटर चलाकर घर की टंकी में पानी भरा था। बाद में जब पीने के लिए पानी निकाला तो उसमें कीचड़ और गंदगी साफ दिखाई दी। उनका कहना है कि अब न तो यह पानी उपयोग के लायक है और न ही पीने के लिए सुरक्षित माना जा सकता है।

इसी तरह पूरन लाल कोष्ठा ने बताया कि नलों से आने वाला पानी पूरी तरह पीने योग्य नहीं है और इलाके में लगातार लोग बीमार हो रहे हैं। वहीं, भास्कर पांडे ने कहा कि नलों से ऐसा पानी आ रहा है कि मानो उसमें कीचड़ मिलाकर सप्लाई किया गया हो। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में इस तरह की लापरवाही संक्रामक और जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है।

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दूषित पानी की सप्लाई से उन परिवारों की परेशानी भी बढ़ गई है जिन्होंने सुबह ही अपनी पानी की टंकियां भर ली थी। लोगों को आशंका है कि पूरी टंकी दूषित पानी से भर चुकी है। जिसके कारण अब टंकियों की सफाई करानी पड़ेगी। इसके अलावा वाटर कूलर और वॉटर फिल्टर जैसे उपकरणों के खराब होने की भी चिंता लोगों को सता रही है।

स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि पेयजल पाइपलाइन की तत्काल जांच कर लीकेज को ठीक किया जाए और क्षेत्र में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो बरसात के मौसम में पूरे इलाके में जलजनित बीमारियों का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही लोगों से भी अपील की जा रही है कि नल के पानी का उपयोग करने से पहले उसके रंग और गंध की जांच करें तथा संदिग्ध पानी को उबालने या शुद्ध करने के बाद ही उपयोग में लाएं।

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