प्रीतम लोधी को बीजेपी ने किया पार्टी से निष्कासित, ब्राह्मणों पर अपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला

प्रीतम लोधी ने 17 अगस्त को बदरवास में एक कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की थी, वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने माफी भी मांगी, हालांकि, पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

Updated: Aug 20, 2022, 10:54 AM IST

प्रीतम लोधी को बीजेपी ने किया पार्टी से निष्कासित, ब्राह्मणों पर अपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला

भोपाल। उमा भारती के करीबी भाजपा नेता प्रीतम सिंह लोधी को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। ब्राह्मण समाज पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में पार्टी ने उनके खिलाफ ये एक्शन लिया है। भाजपा को यह कदम तब उठाना पड़ा जब ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दी। इससे पहले लोधी को सिर्फ तलब किया गया था।

प्रीतम लोधी को भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने तलब किया था। शुक्रवार को वे प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे और अध्यक्ष-महामंत्री को सफाई देते हुए कहा कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। बाद में लोधी ने लिखित में माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि अज्ञानतावश उनसे चूक हो गई। किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उनका मकसद बिलकुल नहीं था।

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उन्होंने कहा कि, 'मैं अत्यधिक शर्मिंदा हूं और खुद को अपराधी महसूस कर रहा हूं। मैं ब्राह्मण और अन्य सभी समाजों का आदर करता हूं। मेरी बहन उमा भारती को प्रकरण का पता चला, उन्होंने बगैर किसी लाग-लपेट के गुरु तुल्य ब्राह्मण समाज से क्षमा मांगने को कहा। मैं क्षमा मांगता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं वह बड़ा दिल कर मेरी गलती के लिए क्षमा करें।'

हालांकि, पार्टी इस माफीनामे से भी संतुष्ट नहीं गई। बताया जा रहा है कि वीडी शर्मा पर काफी दबाव था कि लोधी को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। ऐसे में पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया।

प्रीतम लोधी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि, 'ये ब्राह्मण, लोगों को बेवकूफ बनाते हैं और महिलाओं पर गंदी नजर रखते हैं। यहां आकर कुछ ब्राह्मण भागवत के नाम पर पैसे की उगाही करते हैं। लोगों को बरगलाते हैं और 9 दिनों तक रोज 7 से 8 घंटे तक पागल बनाते हैं। उनकी बातों में आकर महिलाएं अपने घरों से घी, शक्कर, गेहूं, चावल चुरा चुरा कर उनके चरणों में अर्पित कर देती हैं। इसे अपने बच्चों को देने की बजाय ब्राह्मण देवता को दिया जाता है।'