उज्जैन में शंकराचार्य मठ की बिल्डिंग पर चला मोहन सरकार का बुलडोजर, साधु-संतों में आक्रोश

उज्जैन के नर्मदा घाट क्षेत्र स्थित शंकराचार्य मठ में पुण्यानंद गिरी महाराज के आश्रम ध्वस्त किया गया। यहां 54 कमरों वाला तीन मंजिला भवन बनाया गया था, जहां देशभर के श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की जाती थी।

Updated: Feb 25, 2026, 06:21 PM IST

उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में लगातार ध्वस्तीकरण कार्रवाई जारी है। ताबड़तोड़ बुलडोजर एक्शन, लैंड पुलिंग व अन्य मुद्दों को लेकर सिंहस्थ 2028 पहले से विवादों में आ गया है। इसी बीच अब बाबा महाकाल की नगरी में शंकराचार्य मठ की बिल्डिंग पर सरकार का बुलडोजर चला है। इस कार्रवाई को लेकर साधु-संतों में आक्रोश व्याप्त है।

निगम अमले ने पुलिस बल के साथ नृसिंह घाट से लालपुल ब्रिज मार्ग तक 2016 के बाद बने पक्के निर्माणों को हटाया। यह कार्रवाई जोन क्रमांक 03 क्षेत्र में की गई। प्रशासन ने बताया कि सिंहस्थ मेले के लिए साधु-संतों के डेरों, टेंट और श्रद्धालुओं की पार्किंग के लिए जगह खाली कराई जा रही है।

इस दौरान नर्मदा घाट क्षेत्र स्थित शंकराचार्य मठ में पुण्यानंद गिरी महाराज के आश्रम को भी तोड़ दिया गया। यहां 54 कमरों वाला तीन मंजिला भवन बनाया गया था, जहां देशभर के श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की जाती थी। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं से पैसे भी लिए जाते थे। प्रशासन के अनुसार तीन मंजिला बिल्डिंग करीब 10 हजार से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनाया गया था। 

इधर, नरसिंह घाट रोड पर करीब 60×80 फीट के माधवानंद आश्रम और लगभग 80×150 फीट क्षेत्र में बनी कलोता समाज की धर्मशाला को भी ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा बागली समाज और अन्य स्थानों पर भी अतिक्रमण हटाया जा रहा है। 

नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ क्षेत्र में 2016 के बाद बने सभी स्थायी निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इस क्षेत्र में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है और सभी अवैध ढांचे हटाए जाएंगे। वहीं, अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि जिला प्रशासन से मिली सूची में अवैध निर्माणों की जानकारी थी। सिंहस्थ मेले में व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन निर्माणों को हटाया जा रहा है। सिंहस्थ क्षेत्र करीब 180 हेक्टेयर में फैला हुआ है।