अब केरलम के नाम से जाना जाएगा केरल, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी प्रस्ताव को मंजूरी

नाम बदलने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की सरकार ने केंद्र को भेजा था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में फैसला लिया गया।

Updated: Feb 24, 2026, 07:32 PM IST

नई दिल्ली। केरल राज्य का नाम बदल दिया गया है। अब उसे केरलम कहा जाएगा। केंद्र सरकार ने मंगलवार को 'सेवा तीर्थ' (नया प्रधानमंत्री कार्यालय) में पहली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया है। नाम बदलने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की सरकार ने केंद्र को भेजा था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में फैसला लिया गया। अब इसे संसद के दोनों सदनों में भेजा जाएगा, जहां से पारित होने के बाद अधिसूचना जारी होगी।

दरअसल, केरल समेत 5 राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव की घोषणा अप्रैल-मई में हो सकती है, जिससे पहले नाम बदलने के प्रस्ताव को संसद से मंजूरी मिलने की संभावना है।
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा। इस बीच करीब 30 बैठकें होंगी और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की जाएगी। संभावना है कि इसी सत्र में केरल का नाम बदलने का प्रस्ताव लाकर पास कराया जाएगा।

केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत राज्य का नाम बदलकर प्रथम अनुसूची में 'केरलम' करने के लिए उपाय करने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे जून 2024 में पारित किया गया। उनका कहना है कि 'केरलम' मलयालम में उपयोग होता है और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी समुदायों के लिए यह मांग प्रमुख रही है। प्रस्ताव पर केरल में पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हैं।

केरल नाम बदलने का प्रस्ताव 2023 और 2024 में लाया गया और दोनों बार पारित हुआ। हालांकि, 2023 का प्रस्ताव स्थगित हुआ था। मुख्यमंत्री विजयन ने इसका कारण बताते हुए कहा था कि पहले प्रस्ताव में पहली अनुसूची और संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में बदलाव की मांग की गई थी। फिर, जांच करने पर पता चला कि सुधार केरल से केरलम में केवल प्रस्ताव की पहली अनुसूची में किया था। इसलिए, नया प्रस्ताव पारित किया गया।

बता दें कि किसी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया लंबी और संवैधानिक है। पहले राज्य की विधानसभा में नाम बदलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होना जरूरी है। इसके बाद इसे गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, जो सभी मंत्रालयों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेगी। फिर केंद्रीय कैबिनेट में प्रस्ताव भेजा जाएगा, जहां हरी झंडी मिलने पर इसे संसद के दोनों सदनों में रखा जाएगा। संसद में पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते हैं और अधिसूचना जारी कर नाम बदला जाता है।