MP में हर दिन 42 लोग कर रहे आत्महत्या, विधानसभा में सरकार के जवाब ने उड़ाए होश

विधानसभा में CM मोहन यादव द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार पिछले 769 दिनों में राज्य में कुल 32,385 लोगों ने अपनी जान दी है, जिसका अर्थ है कि प्रदेश में हर दिन औसतन 42 लोग मौत को गले लगा रहे हैं।

Updated: Feb 25, 2026, 12:24 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने प्रदेश की सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। राज्य में हर दिन औसतन 42 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। यह जानकारी स्वयं सीएम मोहन यादव ने विधानसभा में दी है। आत्महत्या के इन आंकड़े को विपक्ष ने बर्बादी का प्रमाण करार दिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच 769 दिनों की अवधि में 987 स्‍टूडेंट्स, 562 किसानों और 667 कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की। इसी अवधि में प्रदेश में कुल 32,385 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए, यानी प्रतिदिन औसतन 42 लोगों ने जान दी।

विधानसभा में यह जानकारी कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई के प्रश्न के उत्तर में साझा की गई। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कारण अलग-अलग हैं और प्रत्येक मामले की परिस्थितियां भिन्न होती हैं। हालांकि इतने बड़े आंकड़े ने शिक्षा, कृषि और मानसिक स्वास्थ्य तंत्र की प्रभावशीलता पर बहस तेज कर दी है। 

मुख्यमंत्री के जवाब के अनुसार 769 दिनों में 987 स्‍टूडेंट्स ने आत्महत्या की। यह औसतन प्रतिदिन एक से अधिक छात्र के बराबर है। इसी अवधि में 562 किसानों और 667 खेत मजदूरों की आत्महत्या दर्ज की गई। किसानों से जुड़े मामलों में केवल दो घटनाएं फसल नुकसान से संबंधित बताई गईं। अन्य मामलों के कारणों का विस्तृत वर्गीकरण जवाब में उपलब्ध नहीं कराया गया।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में 15,662 आत्महत्याएं दर्ज हुई थीं। इसका अर्थ है कि उस वर्ष भी औसतन 42 लोग प्रतिदिन इस ख़ौफनाक कदम तक पहुंचे। ताजा आंकड़े उसी प्रवृत्ति के जारी रहने का संकेत देते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्‍टूडेंट्स में परीक्षा दबाव, करियर की अनिश्चितता, पारिवारिक अपेक्षाएं और मानसिक अवसाद प्रमुख कारण हो सकते हैं। हालांकि आधिकारिक जवाब में विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर काउंसलिंग तंत्र को मजबूत करना जरूरी है। डिजिटल युग में सामाजिक तुलना और प्रतिस्पर्धा भी तनाव को बढ़ा रही है।

विपक्ष ने इन आंकड़ों को बर्बादी का प्रमाण करार दिया है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि हम जो आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा के शासनकाल में मध्य प्रदेश बर्बादी की ओर जा रहा है वो सच साबित हो रही है। सीएम मोहन यादव ने भी विधानसभा में इस सच को स्वीकार किया है। यदि प्रदेश में हर रोज 42 लोग मौत को गले लगा रहे हैं तो विकास के सारे दावे फेल हैं। इसे तो अच्छे दिनों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता? उन्होंने यह भी दावा किया कि ये आंकड़े बहुत कम हैं। जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कई गुना ज्यादा हैं।