लूट के नए तरीके ढूंढने के लिए मंथन कर रही सरकार, कैबिनेट के चिंतन शिविर पर बरसे कुणाल चौधरी

कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि पूरे प्रदेश में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, उसपर चिंतन करने की जरूरत थी, चिंतन शिविर से अमृत निकला या विष जनता तय करेगी

Updated: Mar 27, 2022, 02:59 PM IST

लूट के नए तरीके ढूंढने के लिए मंथन कर रही सरकार, कैबिनेट के चिंतन शिविर पर बरसे कुणाल चौधरी

भोपाल। पचमढ़ी में आयोजित दो दिवसीय कैबिनेट के चिंतन शिविर को लेकर शिवराज को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा है कि लूट के नए तरीके ढूंढने के लिए सीएम शिवराज अपने मंत्रियों के साथ चिंतन मनन कर रहे हैं।

कुणाल चौधरी ने कहा कि, 'चिंतन शिविर से अमृत निकला है या विष ये जनता तय करेगी। ये मंथन जनता की गाढ़ी कमाई को खत्म करने के लिए किया जा रहा है। सिर्फ अपनी ब्रांडिंग कैसे की जाए उसके ऊपर चिंतन कर रहे हैं। चिंतन इस बात को लेकर करने की जरूरत है कि गरीब-मजदूर एक लाख तीस हजार रुपए में अपना घर कैसे बनाएगा। शहरों में ढाई लाख और गांव में 1 लाख 30 हजार। क्यों न हम गांव के लोगों को भी शहरों के बराबर पैसा दें? इसपर चिंतन की जरूरत थी।'

कुणाल चौधरी ने आगे कहा कि, 'पूरे प्रदेश में सभी जगह पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पानी की समस्या के ऊपर चिंतन की जरूरत थी। वो जो सिंगल क्लिक डेढ़ महीने पहले किया था उसका पैसा आज तक किसानों के अकाउंट में नहीं पहुंचा। उसके ऊपर चिंतन और मनन करने की जरूरत थी। जो माफ़ियातंत्र मध्य प्रदेश में फैल चुका है उसके ऊपर मंथन की जरूरत थी। पर मंथन इसपर हो रहा है कि कैसे प्रचार किया जाए, कैसे लूट के नए काम ढूंढे जाए?'

यह भी पढ़ें: OBC समाज के साथ अन्याय कर रही है शिवराज सरकार, चयनित शिक्षकों से मुलाकात के बाद बोले अरुण यादव

बेटियों के सामान में दलाली का धंधा खोजा है: चौधरी

युवा विधायक ने आगे कहा कि, 'बेटियों की शादी में कांग्रेस सरकार ने जो 51 हजार रुपए का प्रावधान किया था। ताकि सीधे बेटियां अपने अकाउंट से पैसे निकालकर जो सामान चाहिए वो ले सकें। लेकिन उसमें अब पैसे के बदले सामान देने का प्रावधान कर बेटियों के सामान में दलाली करने का नया धंधा खोला गया है। कैसे ट्रांसफर उद्योग चलाया जाए और उसमें लूटा जाए इसपर चिंतन चल रहा है। ये लूट सके तो लूट योजना के लिए नया चिंतन और मंथन है। इससे सिर्फ विष निकल रहा है जो जनता के हिस्से आ रहा है। मंत्री मदमस्त हैं, पिकनिक मना रहे हैं और लूट का नया टारगेट सेट कर रहे हैं।'