170 दिन बाद आखिरकार रिहा होंगे सोनम वांगचुक, लद्दाख प्रदर्शन के दौरान NSA के तहत किया गया था गिरफ्तार

केंद्र सरकार ने शनिवार को बड़ा फैसला लेते हुए लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) हटा लिया है।

Updated: Mar 14, 2026, 01:32 PM IST

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार 14 मार्च को बड़ा फैसला लेते हुए लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाकर सभी पक्षों के साथ सार्थक संवाद आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद की गई थी जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। सरकार का कहना था कि उस समय कानून व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई थी और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।

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सरकार के अनुसार, वांगचुक ने एनएसए के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर लिया है। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले महीनों में लद्दाख के विभिन्न समुदायों और प्रतिनिधियों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है ताकि क्षेत्र की आकांक्षाओं और चिंताओं का समाधान निकाला जा सके।

केंद्र सरकार ने बयान में यह भी उल्लेख किया है कि लंबे समय से चल रहे बंद और विरोध प्रदर्शनों का असर समाज के कई वर्गों पर पड़ा है। इससे छात्रों, नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, स्थानीय कारोबारियों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों के साथ साथ पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। सरकार ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए शांति और संवाद का रास्ता मजबूत करने के लिए वांगचुक की हिरासत समाप्त करने का फैसला किया गया है। गृह मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि सरकार लद्दाख को आवश्यक संवैधानिक और प्रशासनिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान उच्चस्तरीय समिति और अन्य उपयुक्त मंचों के माध्यम से संवाद और सहभागिता से निकाला जाएगा।

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सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पिछले साल लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई थी। उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया था जब वे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए जा रहे थे। अधिकारियों ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने प्रदर्शनों को भड़काने में भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्हें पहले लद्दाख में हिरासत में लिया गया और बाद में राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। 

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी उनके खिलाफ दायर याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि लेह में हुई हिंसा के पीछे वे मुख्य उकसाने वालों में से एक थे। सरकार का यह भी दावा था कि उनकी गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने लगी थी और हिरासत की पूरी प्रक्रिया कानून के प्रावधानों के अनुसार की गई थी। स्वास्थ्य आधार पर रिहाई की मांग को लेकर सरकार ने अदालत में यह भी कहा था कि उनकी तबीयत को लेकर पेश की गई दलीलें बनावटी हैं और हिरासत के दौरान उनका 24 बार चिकित्सकीय परीक्षण किया गया था।

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वांगचुक की पत्नी गीताांजलि जे. आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी हिरासत को चुनौती दी थी। इस पर अदालत में सुनवाई चल रही थी और अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित थी। इस बीच आंगमो ने एक इंटरव्यू में कहा था कि रिहाई के बाद वांगचुक आंदोलन की आक्रामक राह नहीं अपनाएंगे बल्कि लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को बातचीत और संवाद के जरिए आगे बढ़ाएंगे। हिरासत के दौरान वांगचुक जोधपुर सेंट्रल जेल में रखे गए थे और करीब 140 दिनों से अधिक समय तक बंद रहे। उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से भी संकेत दिया था कि वे सक्रियता से पीछे नहीं हटे हैं लेकिन आगे की राह स्पष्टता, एकता और ईमानदार संवाद के साथ तय की जानी चाहिए।