मौसम विभाग ने जारी की सुपर अल नीनो की चेतावनी, भारत में इस साल गर्मी तोड़ेगी सारे रिकॉर्ड

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में बन रहा संभावित सुपर अल नीनो 2026 को इतिहास के सबसे गर्म सालों में शामिल कर सकता है। भारत में तापमान 45–50 डिग्री तक पहुंचने और मानसून कमजोर पड़ने की आशंका है।

Updated: Mar 15, 2026, 01:12 PM IST

नई दिल्ली। जलवायु वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2026 दुनिया के सबसे गर्म सालों में शामिल हो सकता है। प्रशांत महासागर में बनने वाले संभावित सुपर अल नीनो को इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके प्रभाव से भारत में भीषण गर्मी पड़ सकती है और तापमान कई इलाकों में 50 डिग्री सेल्सियस के करीब तक पहुंच सकता है। इसी बीच राजधानी दिल्ली में रविवार को तेज बारिश और धूल भरी आंधी से मौसम में अस्थायी बदलाव देखने को मिला। जिससे तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।

मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में रविवार को कई इलाकों में तेज बारिश हुई और 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली। सुबह के समय आसमान में घने काले बादल छा गए थे। जिससे कई जगहों पर अंधेरा जैसा माहौल बन गया था। इसकी वजह से वाहन चालकों को लाइट जलाकर सड़क पर चलना पड़ा और ट्रैफिक की रफ्तार भी धीमी हो गई थी। कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश भी हुई। जबकि, कई जगहों पर धूल भरी आंधी चली थी। विभाग ने पहले ही दिन के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी थी।

बारिश के बाद राजधानी में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि शाम तक तापमान में और गिरावट संभव है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत ज्यादा समय तक रहने वाली नहीं है क्योंकि आने वाले महीनों में गर्मी तेज होने की आशंका बनी हुई है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस संभावित गर्मी की बड़ी वजह सुपर अल नीनो है। सामान्य तौर पर अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ जाता है। जिससे दुनिया भर के मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं। जब यह तापमान सामान्य से करीब 2 से 2.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है तो स्थिति को सुपर अल नीनो कहा जाता है। इसका असर वैश्विक स्तर पर मौसम को असामान्य बना देता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति मजबूत हुई तो भारत में मार्च और अप्रैल से ही कई इलाकों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। बड़े शहरों में हीट आइलैंड प्रभाव के कारण रात का तापमान भी ज्यादा रहेगा। जिससे लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पाएगी।

सुपर अल नीनो का असर केवल गर्मी तक सीमित नहीं रहता। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका सीधा असर मानसून पर भी पड़ सकता है। भारत में पहले भी कई बार अल नीनो के दौरान मानसून कमजोर रहा है। अगर इस बार सुपर अल नीनो बनता है तो बारिश में देरी या कमी की आशंका बढ़ सकती है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा और खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

जलवायु विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बढ़ते क्लाइमेट चेंज ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। पृथ्वी का औसत तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ है। ऐसे में सुपर अल नीनो की स्थिति गर्मी को और ज्यादा खतरनाक बना सकती है। इसी वजह से साल 2026 को इतिहास के सबसे गर्म सालों में गिना जाने की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों ने प्रशासन को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि संभावित हीटवेव और जल संकट को देखते हुए शहरों और राज्यों को अभी से हीट एक्शन प्लान, जल प्रबंधन और बिजली की बढ़ती मांग से निपटने की रणनीति तैयार करनी चाहिए। वहीं, लोगों को भी गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने और मौसम से जुड़ी चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।