इंदौर: भागीरथपुरा के 22 परिवार अस्थियां लेकर प्रयागराज रवाना, कांग्रेस सेवादल ने की विसर्जन-पिंडदान की व्यवस्था
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मरने वालों में से 22 परिवार अस्थि विसर्जन के लिए प्रयागराज रवाना हुए। कांग्रेस सेवादल ने इस यात्रा का आयोजन किया है।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अपने परिजनों को खो चुके 22 परिवार शनिवार को अस्थियां लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हुए। ये परिवार गंगा तट पर सनातन परंपरा के अनुसार अस्थि विसर्जन और अन्य धार्मिक संस्कार करेंगे। इस पूरी यात्रा और धार्मिक कार्यक्रम की व्यवस्था कांग्रेस सेवादल की ओर से की गई है।
शनिवार सुबह मामाजी की धर्मशाला से भागीरथपुरा चौराहे तक अस्थियों को मंत्रोच्चार के साथ विदाई दी गई। इस दौरान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों के साथ अंतिम धार्मिक प्रक्रिया की शुरुआत कराई। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष अवनीश भार्गव और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे समेत कई कांग्रेस नेता और स्थानीय लोग मौजूद थे।
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सेवादल के शहर अध्यक्ष मुकेश यादव के अनुसार, प्रयागराज पहुंचने के बाद सभी मृतकों की अस्थियों का गंगा में विसर्जन कराया जाएगा। इसके साथ ही विद्वान पंडितों की मौजूदगी में पिंडदान, तर्पण और दान जैसी धार्मिक विधियां भी संपन्न कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि ये सभी संस्कार सनातन परंपरा के अनुसार बनारस के पंडितों द्वारा कराए जाएंगे।
प्रयागराज में होने वाले इस धार्मिक कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। कांग्रेस सचिव सत्यनारायण पटेल, प्रयागराज के सांसद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय वहां मौजूद रहेंगे। वहीं, व्यवस्थाओं को संभालने के लिए वार्ड प्रमुख रानू मलोरिया के साथ करीब 10 कांग्रेस कार्यकर्ता पहले ही प्रयागराज पहुंच चुके हैं।
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दरअसल, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में नगर निगम की पानी सप्लाई में दूषित जल मिलने के कारण डायरिया फैल गया था। इस बीमारी की चपेट में आने से कुल 36 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नगर निगम पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा बस्ती मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आती है और निगम की लापरवाही के कारण ही वहां दूषित पानी की सप्लाई हुई जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।
पटवारी ने मृतकों के परिजनों को दिए गए मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि नगर निगम अपने कर्मचारियों की मृत्यु होने पर 30 लाख रुपए से अधिक का मुआवजा देता है। जबकि, भागीरथपुरा में दूषित पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को केवल दो-दो लाख रुपए दिए गए जो कि स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है।
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