इंदौर में अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य, 1500 स्क्वायर फीट और उससे बड़े मकानों में लगाना होगा सिस्टम

इंदौर में सभी प्रकार के गैर आवासीय और सरकारी भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य कर दिया गया है, शासन की ओर से इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर पालन कराने को कहा गया है

Updated: Apr 10, 2022, 12:13 PM IST

इंदौर में अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य, 1500 स्क्वायर फीट और उससे बड़े मकानों में लगाना होगा सिस्टम

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में बारिश के पानी को सहेजने के लिए हर घर में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। राज्य शासन ने यह सिस्टम लागू करने के लिए आदेश जारी कर दिया है। बता दें कि इंदौर में भूजल का स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। केंद्र ने इंदौर को जल संकट के डार्क जोन में रखा है, यहां कई इलाकों में भूजल का स्तर 600 से 800 फीट नीचे तक चला गया है।

दरअसल, पिछले साल ही इंदौर नगर निगम की ओर से शासन को रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करने संबंधी प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद हाल ही में शासन ने इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर पालन कराने को कहा है। खास बात कि इंदौर स्वच्छता में पांच बार देश में परचम लहरा चुका है। ऐसे में संभव है कि अब जल संरक्षण में भी इंदौर इसे लेकर नए आयाम देगा।

सरकारी आदेश के मुताबिक अब 1500 वर्ग फीट या उसे बड़े भवनों को अनुमति तब मिलेगी जब रेन हार्वेस्टिंग लगा लिया हो और वह भी चालू हालत में हो। इसका उल्लंघन पाए जाने पर 500 रु. से 5 हजार रु. तक की पेनल्टी लगाई जाएगी। नियमों के तहत पहले से निर्मित या निर्माण के लिए प्रस्तावित 1,500 वर्ग फीट के भवनों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम छत पर या अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित करना होगा। ऐसे ही 10 हजार वर्ग फीट और 25 हजार वर्ग फीट के बीच के क्षेत्र में आवासीय भवनों की अनुमति के लिए बिल्डर को 4 मीटर व्यास और 15 मीटर गहराई (साइट के स्तर के आधार पर गहराई भिन्न हो सकती है) वाला एक गड्ढा बनाना होगा।

जबकि 25 हजार वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल में आवासीय भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त करने के लिए 6 मीटर का गड्‌ढा बनाना होगा। पहले से बने या प्रस्तावित गैर-आवासीय भवनों के लिए भी यह नियम लागू होगा। ऐसे ही सभी सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य है। इसके लिए संबंधितों को भवन की अनुमति के लिए आवेदन के साथ सिक्युरिटी राशि जमा करनी होगी। अधिकारियों द्वारा मौके पर परीक्षण करने के बाद उक्त राशि लौटा दी जाएगी।

नगर निगम द्वारा इस साल मानसून के पहले 5 वार्डों में यह सिस्टम पूरा कराने के प्रयास हैं।