शाजापुर में दबंगों ने दलित छात्रों को स्कूल जाने से रोका, विरोध करने पर परिजनों से कि मारपीट

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में कुछ दबंगों ने दलित नाबालिग लड़की को स्कूल जाने से रोक दिया। इसी बात को लेकर दो पक्षों में जमकर विवाद हुआ और उनके बीच लाठी-डंडे भी चले। इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

Updated: Jul 26, 2022, 11:52 AM IST

शाजापुर में दबंगों ने दलित छात्रों को स्कूल जाने से रोका, विरोध करने पर परिजनों से कि मारपीट

शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां दबंगों ने एक दलित बच्ची को स्कूल जाने से रोक दिया। परिजनों ने जब इसका विरोध किया तो तो दबंगों ने लाठी डंडों से उन्हें बुरी तरह पीटा।

मामला शाजापुर जिले के बावलियाखेड़ी गांव का है।
16 वर्षीय छात्रा को स्कूल जाने को रोका गया। छात्रा लक्ष्मी मेवाड़ ने मीडियाकर्मियों को बताया कि जब मैं स्कूल से लौट रही थी तो गांव के ही माखन, कुंदन और धर्मेंद्र सिंह ने मेरा रास्ता रोक लिया। उन्होंने कहा हमारे गांव में लड़कियां स्कूल नहीं जाती, तुम भी नहीं जाओगी। यह बात मेरे भाई ने सुनी तो उसने विरोध करते हुए कहा- मेरी बहन तो पढ़ने जाएगी। इसी बात पर वे भड़क गए।

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आरोपियों ने छात्रा के भाई से विवाद शुरू कर दिया। इस दौरान परिवार के लोगों ने उन्हें अलग किया। कुछ देर बाद उन्होंने फिर से लाठी-डंडे से हमला बोल दिया। विवाद में 55 साल के नारायण मेवाड़, 50 साल की अंतर बाई, 27 साल के कमल मेवाड़ और 16 साल के सचिन को चोट आई है। कोतवाली थाना प्रभारी एके शेषा ने बताया पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं।

घटना सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने सीएम शिवराज की तीखी आलोचना की है। कांग्रेस ने कहा कि शिव'राज में दलितों पर अत्याचार जारी है... शाजापुर में दबंगों ने दलित लड़की को स्कूल जाने से रोका और धमकाया, लाठी-डंडे चलाए। शिवराज जी,
दलितों को जीने क्यों नहीं देते?' 

मामले पर भीम आर्मी के प्रदेश प्रमुख सुनील अस्तेय ने कहा कि, 'शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है दलित लड़की को स्कूल जाने से रोक रहे जातिवादी मूर्खो को संविधान का पाठ पढ़ाना जरूरी है। क्या अब बुलडोजर चलेगा? क्योकि इन गुंडों ने बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ व्यवस्था को खत्म करने का प्रयास किया है। हम गांव की बहादुर बेटी के साथ खड़े हैं।'