सिंधिया के मंत्रियों का बुरा हाल, अधिकारी मंजूरी लेना जरूरी नहीं समझते, फ़ाइल बढ़ गई पर मंत्री को खबर नहीं

मिड डे मील योजना के तहत सूखा राशन योजना में बड़े स्तर पर अनिमितता की खबर, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने पंचायत और  ग्रामीण विकास मंत्री की सहमति बगैर 285 करोड़ के काम बांटे

Updated: Apr 04, 2021, 04:21 PM IST

सिंधिया के मंत्रियों का बुरा हाल, अधिकारी मंजूरी लेना जरूरी नहीं समझते, फ़ाइल बढ़ गई पर मंत्री को खबर नहीं

भोपाल। मध्यप्रदेश में सूखे राशन की होम डिलीवरी में बड़े स्तर पर अनिमितता की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंधिया के साथ बीजेपी में आए मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया की सहमति के बगैर पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्रालय की फ़ाइलें आगे बढ़ा दी गईं। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने 285 करोड़ का काम अलॉट करने के पहले सिसोदिया की मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं समझा। 

खबर है कि, लॉकडाउन के बाद स्कूल बंद होने की स्थिति में केंद्र सरकार के निर्देशानुसार मिड-डे-मील की जगह सूखा राशन की होम डिलीवरी होनी थी। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्रालय के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने इससे संबंधित करीब 285 करोड़ का काम केंद्रीय भंडार को अलॉट किया। लेकिन आरोप है कि करोडों का काम देने से पहले विभाग के मंत्री से सहमति नहीं ली गई और फ़ाइल को आगे बढ़ा दिया गया।

मंत्री सिसोदिया को बाद में जब इस बात की खबर लगी तो उन्होंने नोट-शीट जारी कर चीफ सेक्रेटरी से जांच की मांग की है। सिसोदिया यह जानना चाहते हैं कि किस नियम के आधार पर केंद्रीय भंडार को यह कार्य सौंपा गया। सिसोदिया ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी सहमति के बिना फ़ाइल को आगे बढ़ाया गया, हालांकि उन्होंने इस बात को खारिज किया है कि योजना में कोई अनिमितता बरती गई है।

सूत्रों का कहना है कि सोया तेल, चिक्की और तुवर दाल को बाजार के रेट से महंगा खरीदा गया था। थोक में सामान खरीदे गए थे इसलिए इनके दाम बाजार दर से कम होने चाहिए थे, लेकिन मीडिया खबरों में ये पाया गया है तब के बाजार के भाव से भी महंगी कीमतों पर अनाज खरीदे गए। आमतौर पर इतनी बड़ी खरीद के लिए टेंडर जारी किए जाते हैं, ताकि दरों को कमतर रखा जा सके लेकिन इस मामले में यह नहीं किया गया था।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह स्थिति सिर्फ ग्रामीण विकास मंत्रालय की नहीं है। सिंधिया समर्थक सभी मंत्रियों के विभागों में लगभग यही कहानी है। विभाग के अधिकारी ही मंत्रियों के बात नहीं सुनते। बिना सहमति के फाइलों को आगे बढ़ा दिया जाता है। हालांकि, उन्होंने इस बात के बारे में कुछ नहीं कहा कि किसके इशारों पर ये अधिकारी काम कर रहे हैं।

बहरहाल, इस मामले के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में इस बात की चर्चाएं तेज हैं कि बीजेपी में सिर्फ सिंधिया ही उपेक्षा के शिकार नहीं हो रहे हैं बल्कि पूरी टीम सिंधिया को इससे गुजरना पड़ रहा है। शिवराज कैबिनेट के सिंधिया समर्थक मंत्री भी इससे अछूते नहीं हैं।