CG: अफीम की खेती मामले में BJP नेता गिरफ्तार, 11 एकड़ में उगा रखी थी 8 करोड़ की अफीम

जांच में पता चला कि आरोपियों ने चालाकी से पहले खेत में मक्का बोया था और उसी के बीच अफीम के पौधे लगाए थे, ताकि किसी को शक न हो।

Updated: Mar 08, 2026, 03:38 PM IST

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 11 एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती का बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। विपक्ष इस मामले पर हमलावर है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा है आरोपी भाजपा नेता को सरकार का संरक्षण प्राप्त था।

दरअसल, दुर्ग जिले के समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम ने इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और जिला प्रशासन को सूचना दी। दुर्ग कलेक्टर के निर्देश पर चार विभागों की संयुक्त टीम ने खेतों में पहुंचकर जांच की, जिसमें बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का खुलासा हुआ। 

जांच में पता चला कि आरोपियों ने चालाकी से पहले खेत में मक्का बोया था और उसी के बीच अफीम के पौधे लगाए थे, ताकि किसी को शक न हो। करीब 10 से 15 प्रतिशत पौधों पर चीरा लगाने के निशान मिले, जिससे साफ है कि उनसे मॉर्फिन युक्त नशीला पदार्थ निकाला जा चुका था। बाकी करीब 80 प्रतिशत पौधे अभी फूल आने या बढ़ने की अवस्था में थे। 

प्रशासन की जांच में सामने आया कि यह खेती भाजपा नेता विनायक ताम्रकार की निगरानी में हो रही थी। जमीन शिवनाथ नदी के किनारे स्थित है और इसका कुछ हिस्सा विनायक ताम्रकार और उनके भाई के नाम पर है। वहीं, पास की जमीन उनकी रिश्तेदार प्रीतिबाला ताम्रकार और मधुबाला ताम्रकार के नाम पर बताई गई है, जो लंबे समय से दूसरे शहर में रहती हैं और जमीन की देखरेख विनायक को सौंप रखी थी।

मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ समोदा गांव पहुंचे और अफीम की खेती वाले खेतों का निरीक्षण किया। वहीं भाजपा ने भी कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकार को पार्टी से निलंबित कर दिया। पुलिस ने जांच के आधार पर विनायक ताम्रकार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं चौथे आरोपी को पकड़ने के लिए अलग टीम रवाना की गई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में उगाई गई अफीम की सप्लाई कहां की जाती थी और यह अवैध खेती कब से चल रही थी। गांव के कुछ लोगों का दावा है कि यह काम करीब चार साल से चल रहा था।