मंत्री उषा ठाकुर का दावा, जहां शराब पर रोक है, वहां अपराध ज़्यादा बढ़े हैं

मध्य प्रदेश की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर का दावा, जहां शराबबंदी होती है, वहां ज्यादा अपराध होते हैं, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा नई दुकानें खोलने की कर चुके हैं वकालत, उमा भारती शराबबंदी लागू कराना चाहती हैं

Updated: Feb 11, 2021, 02:57 PM IST

मंत्री उषा ठाकुर का दावा, जहां शराब पर रोक है, वहां अपराध ज़्यादा बढ़े हैं
Photo Courtesy: Sentinel Assam

इंदौर। अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाली मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जो नया विवाद खड़ा कर सकता है। शिवराज सरकार की संस्कृति मंत्री का दावा है जिन प्रदेशों में शराबबंदी हुई है, वहां अवैध शराब बिक्री अधिक होती है। अराजकता और अपराध की घटनाएं भी ज्यादा होती हैं। अपनी बात पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी को भरोसा न हो तो उन राज्यों के आंकड़ों को गौर से देख लिया जाए। गौरतलब है कि देश के जिन राज्यों में शराबबंदी लागू है, उनमें गुजरात और बिहार प्रमुख हैं।

उषा ठाकुर ने कहा है कि मध्य प्रदेश में शराबबंदी से ज्यादा जरूरी जनता को शराब से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि शराब पर पाबंदी लगाना तो आसान है, लेकिन यह भी कड़वी सच्चाई है कि जहां-जहां शराब पर रोक लगाई गई है, उन इलाकों में शराब की अवैध बिक्री ज्यादा होती है। 

इंदौर में एक कार्यक्रम में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि शराबबंदी की चर्चा गली, मोहल्ले और चौराहों की बजाय कैबिनेट में होनी चाहिए। एक इंसान शराब का सेवन करता है, लेकिन उसका खामियाजा शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक रुप से उसके परिवार को झेलना पड़ता है। 

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ अरसे के दौरान शराबबंदी के बारे में बीजेपी के नेताओं की अलग-अलग राय सामने आती रही है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा शराब की ज़्यादा से ज़्यादा दुकानें खोलने की बात कर चुके हैं, तो पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती शराबबंदी के लिए मध्य प्रदेश में अभियान छेड़ने का एलान कर चुकी हैं। शिवराज सरकार शराब की नई दुकानें खोलने के बारे में प्रस्ताव मंगाने के बाद विवाद होने पर उस फैसले पर रोक लगा चुकी है। ऐसे में कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर का ताज़ा बयान बीजेपी में शराब के मुद्दे पर पहले से कायम कनफ्यूज़न को और बढ़ा सकता है। दरअसल पिछले महीने जहरीली शराब पीने से मुरैना में 25 लोगों की मौत होने के बाद से ही प्रदेश में शराबबंदी का मुद्दा गरमाया हुआ है।