हर रात मेरे पास एक लड़की भेजा करो, डिमांड पूरी नहीं हुई तो SDM ने बंद कराया कन्या छात्रावास, वार्डन का गंभीर आरोप

शिवपुरी में पिछोर SDM पर बंद हो चुके सीनियर कन्या छात्रावास की वार्डन का सनसनीखेज आरोप, बोली- छात्राओं पर थी एसडीएम की बुरी नजर, गलत काम के लिए हर रात एक लड़की मांगते थे

Updated: Aug 09, 2022, 07:10 PM IST

हर रात मेरे पास एक लड़की भेजा करो, डिमांड पूरी नहीं हुई तो SDM ने बंद कराया कन्या छात्रावास, वार्डन का गंभीर आरोप

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां बंद हो चुके कन्या छात्रावास की वार्डन ने दावा किया है कि एसडीएम की छात्राओं पर बुरी नजर थी। उन्होंने डिमांड किया कि हर रात मेरे बंगले पर हॉस्टल से एक छात्रा को भेज दिया करो। जब डिमांड पूरी नहीं हुई तो एसडीएम ने हॉस्टल ही बंद करवा दिया।

मामला शिवपुरी में पिछोर स्थित बंद हो चुके सीनियर कन्या छात्रावास (प्रथम) का है। यहां राजकुमारी कोली बतौर वार्डन पदस्थ थी। उन्होंने बताया कि पिछोर SDM बिजेंद्र यादव के पास पहले आदिम जाति कल्याण विभाग का प्रभार भी था। वे प्रभारी जिला संयोजक भी हुआ करते थे। मई 2022 में वे हॉस्टल का निरीक्षण करने पहुंचे थे और यहां रहें वाली छात्राओं पर उनकी बुरी नजर थी।

बकौल राजकुमारी कोली एसडीएम ने दबाव बनाते हुए कहा कि रात में एक छात्रा को बंगले पर भेज दिया करो और सुबह वापस ले जाया करो। उन्होंने आरोप लगाया कि एसडीएम 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्राओं को अपनी हवस का शिकार बनाना चाहते थे। कोली ने कहा कि, 'मेरे मना करने पर उन्होंने कहा कि छात्राओं को नहीं भेज पा रही तो तुम खुद बंगले पर आ जाया करो। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने हॉस्टल को बंद कराने की धमकी भी दी।'

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उन्होंने बताया कि, 'जब SDM के गलत इरादे पूरे नहीं हुए तो उन्होंने नियमों को दरकिनार कर हॉस्टल बंद करवा दिया। मेरा ट्रांसफर कर दिया गया। मुझे हॉस्टल के ऑफिस में अटैच कर दिया गया।' कोली ने यह भी दावा किया है कि SDM रात में हॉस्टल के चक्कर लगाते थे। रात में भी जबरन हॉस्टल आ जाते थे और अपने गंदे अरमानों को पूरा करना चाहते थे। वार्डन ने इससे जुड़े कुछ फोटो भी शिकायत के साथ अफसरों को दिए हैं।

SDM पिछोर ने इन आरोपों का खण्डन किया है। उनका कहना है कि अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए हॉस्टल्स के निरीक्षण पर जाता था। कोली द्वारा लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं।