बक्सर में गंगा किनारे लगा लाशों का मजमा, पानी में दिखे 40 से ज्यादा मानव शरीर, टूट पड़े चील-कौऐ

बिहार के बक्सर जिले में चौसा महादेव घाट के किनारे सोमवार को 40-45 लाशें मिलने से हड़कंप मच गया है, प्रशासन का दावा है कि ये लाशें उत्तरप्रदेश से बहकर आई हैं

Updated: May 11, 2021, 03:09 AM IST

बक्सर में गंगा किनारे लगा लाशों का मजमा, पानी में दिखे 40 से ज्यादा मानव शरीर, टूट पड़े चील-कौऐ
Photo Courtesy: Twitter

बक्सर। कोरोना वायरस महामारी ने देशभर में मौत का ऐसा तांडव मचाया है कि अब रसूखदार घरों के मृतकों को ही श्मशान और कब्रिस्तानों में जगह मिल रही है। आम नागरिकों को सिर्फ अस्पतालों में बेड ही नहीं बल्कि श्मशानों में भी जगह नसीब नहीं हो रही है। ऐसा ही एक भयावह मामला बिहार के बक्सर से देखने को मिला है जहां से गंगा किनारे 40-45 लावारिश लाशें (सरकारी आंकड़ों में) बरामद की गई हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि लाशों की संख्या 100 के पार है।

बिहार सरकार ने इन लाशों के लिए उत्तरप्रदेश को जिम्मेदार ठहराया है। बक्सर प्रशासन का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में लाशें उत्तरप्रदेश के अलाहाबाद और वाराणसी से बहकर बक्सर की ओर आ रही है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि ये लाशें कोरोना मृतकों के हैं, या फिर सामान्य मौत के बाद इन्हें गंगा में बहाया गया है। बक्सर डीएम ने बताया है कि इन शवों का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा और इसके बाद सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

हालांकि, डीएम के आदेश के कुछ ही देर बाद प्रशासन ने वहीं चौसा महादेव घाट पर बिना पोस्टमार्टम किए लाशों को दफनाने का काम शुरू कर दिया। सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के नाम पर चौसा बीडीओ अशोक कुमार की देखरेख में नदी किनारे ही जेसीबी मंगवाकर बड़ा सा गड्ढा खोदा गया और उसमें एक-एक कर सभी शव दफ्न कर दिए गए। बीडीओ ने बताया कि करीब 40-45 शव थे। 

यह भी पढ़ें: हवा में 6 फीट से भी ज्यादा दूर जा सकता है कोरोना वायरस, अमेरिका ने जारी की अपने नागरिकों के लिए नई गाइडलाइंस

इन लाशों को दफनाने वालों को प्रशासन की ओर से पीपीई किट भी मुहैया नहीं करवाई गई थी। यह शायद इसलिए क्योंकि उनकी मौत कोरोना से हुई थी या नहीं इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी। शवों को दफ्न करने के काम में लगे लोगों ने मीडिया को बताया कि 40 से ज्यादा शवों को डिस्पोज किया जा चुका है, जबकि इतनी ही संख्या में और शव अभी बचे हुए हैं। घाट की कई तस्वीरें भी सामने आई है जिसमें देखा जा सकता है कि लाशों के अंबार को देखकर चील, कुते और कौए उन्हें नोच खाने के लिए टूट पड़े हैं। 

चौसा बीडीओ ने कहा है कि ये लाशें हमारे प्रदेश की नहीं हैं। उत्तरप्रदेश से लाशें बहकर आ रही हैं, जिन्हें रोकने का कोई प्रबंध भी नहीं किया जा सकता है। इसलिए हम इनके निपटारे की व्यवस्था कर रहे हैं। बक्सर के सदर एसडीओ ने कहा है कि हमारे यहां लाशों को जलाने की परंपरा है, प्रवाहित करने की नहीं। इससे स्पष्ट है कि ये लाशें यूपी की हैं। हालांकि, बक्सर से सटे उत्तरप्रदेश के जिलों की ओर से इस बात को स्पष्ट तौर पर खारिज किया गया है कि ये लाशें यूपी से बहकर बिहार की ओर गई है। 

यह भी पढ़ें: चीन 2015 से कोरोना को जैविक हथियार बनाने के लिए कर रहा था शोध, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट में खुलासा

चौसा के स्थानीय लोगों ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया है कि यहां की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। श्मशान में जगह नहीं हैं, लाशों को जलाने के लिए लकड़ियां कम पड़ रही हैं, ऐसे में मृतकों के परिजन मजबूरी में अपने प्रियजनों को गंगा के हवाले कर चले जाते हैं। स्थानीय लोग इसे सीधे तौर पर प्रशासनिक नाकामियों का नतीजा करार दे रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बक्सर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे का संसदीय क्षेत्र है।