कांग्रेस ने ही उन्हें पहचान दी, क्या नहीं बनाया, गुलाम नबी आजाद पर बरसे सीएम अशोक गहलोत

अशोक गहलोत ने कहा कि उन्हें देश में आज कोई जानता भी नहीं, वे जो हैं सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस पार्टी की वजह से हैं, उन्हें क्या नहीं बनाया, मुख्यमंत्री बनाया, पीसीसी चीफ की जिम्मेदारी दी, केंद्रीय मंत्री और एआईसीसी महासचिव बनाया, 42 साल तक वे कभी बिना पद के नहीं रहे

Updated: Aug 26, 2022, 08:04 PM IST

कांग्रेस ने ही उन्हें पहचान दी, क्या नहीं बनाया, गुलाम नबी आजाद पर बरसे सीएम अशोक गहलोत

नई दिल्ली। कांग्रेस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। सोनिया गांधी को संबोधित इस्तीफा पत्र में उन्होंने हाईकमान के फैसलों पर सवाल खड़े किए हैं। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने आजाद के इस फैसले की तीखी आलोचना की है।

अशोक गहलोत ने कहा कि, 'गुलाम नबी आज को आज कोई पहचानता भी नहीं। कांग्रेस ने ही उन्हें पहचान दी है। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें क्या कुछ नहीं दिया? कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, पीसीसी अध्यक्ष बनाया, केंद्रीय मंत्री का पद दिया, एआईसीसी महासचिव बनाया। आज वे जो कुछ भी हैं कांग्रेस पार्टी की वजह से ही हैं। पिछले 42 साल तक वे कभी भी बिना पद के नहीं रहें। इसके बावजूद आज वे हाईकमान पर सवाल खड़े कर रहे हैं?'

"चापलूसों से घिरी हुई है पार्टी" इस बात का जवाब देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि, 'गुलाम नबी आजाद संजय गांधी के बेहद करीबी थे। आजाद को भी उस समय चापलूस ही कहा जाता था। तब के नेता भी यही कहते थे कि संजय गांधी चापलूसों से घिरे हैं। लेकिन यदि तब दबाव में आकर वे इन्हें हटा देते तो क्या इन्हें कभी मौका मिलता? तो ये क्यों चाहते हैं कि इनकी बातों को मानकर राहुल गांधी अन्य लोगों को हटा दें। काम करने का सबका अपना तरीका होता है। कांग्रेस को आगे ले जाने के लिए राहुल गांधी को जो ठीक लगेगा वो करेंगे।'

इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर भी अशोक गहलोत ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि, 'इसके पहले जब सोनिया गांधी बीमार थीं तब गुलाम नबी आजाद ने चिट्ठी लिखा था। तब पार्टी के कई नेताओं ने सवाल उठाए थे कि जब सोनिया गांधी बीमार हैं तब उन्हें क्यों पत्र लिखा गया? लेकिन इस बार भी वही हुआ। सोनिया गांधी मेडिकल चेकअप के लिए अमेरिका गई हुईं हैं। पूरे देश को ये बात पता है। लेकिन जब वह बीमार हैं तब उन्हें त्यागपत्र भेजा गया। आजाद इससे क्या साबित करना चाहते हैं ये मेरे समझ के बाहर है।'