भगोड़े विजय माल्या ने चली एक और चाल, भारत लाए जाने से बचने का नया पैंतरा

प्रत्यर्पण के खिलाफ विजय माल्या की याचिका खारिज होने के बाद भगोड़े शराब कारोबारी ने ब्रिटेन के गृह मंत्री प्रीति पटेल को दी नई अर्जी

Updated: Jan 23, 2021, 10:24 AM IST

भगोड़े विजय माल्या ने चली एक और चाल, भारत लाए जाने से बचने का नया पैंतरा
Photo Courtesy: The Indian Express

लंदन। भारत के कई बैंकों से अरबों रुपये का कर्ज लेकर फरार चल रहा भगोड़ा शराब कारोबारी विजय माल्या  भारत लाए जाने से बचने के लिए लगातार नए रास्ते तलाश रहा है। ब्रिटेन में रहने के लिए माल्या ने एक और नई चाल चली है। माल्या ने ब्रिटेन में गृह मंत्री प्रीति पटेल के सामने एक अर्जी लगाई है। इस बात की जानकारी माल्या के वकील ने कोर्ट में दी है। हालांकि गोपनीयता का हवाला देते हुए वकील ने यह नहीं बताया है कि उस अर्जी में क्या है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि माल्या ने ब्रिटेन में शरण दिए जाने की अर्जी लगाई है।

विजय माल्या के वकील फिलिप मार्शल ने शुक्रवार को लंदन के एक कोर्ट में सुनवाई के दौरान इन्सॉल्वेंसी एंड कंपनीज के जज निगेल बार्नेट के सवाल के जवाब में कहा, 'प्रत्यर्पण की प्रक्रिया बरकरार है लेकिन विजय माल्या अबतक इसलिए ब्रिटेन में हैं क्योंकि उन्होंने यहां रहने के लिए एक और विकल्प आजमाते हुए गृह मंत्री प्रीति पटेल से गुहार लगाई है।'

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि माल्या को ब्रिटेन में शरण मिलेगी या नहीं ये इस बात पर निर्भर है कि माल्या ने प्रत्यर्पण अनुरोध से पहले शरण के लिए आवेदन किया या नहीं। गौरतलब है कि ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को भारत सरकार को प्रत्यर्पित करने के खिलाफ दायर याचिका को पिछले साल अक्टूबर में खारिज कर दिया था। फिलहाल वह तब तक जमानत पर है जब तक गृह मंत्री प्रीति पटेल उसे भारत प्रत्यर्पित करने के आदेश पर हस्ताक्षर नहीं कर देतीं।

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय द्वारा इस संबंध में केवल इस बात की पुष्टि की गई है कि प्रत्यर्पण आदेश पर अमल किये जाने से पहले गोपनीय कानूनी प्रक्रिया चल रही है। पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत लाने के सभी प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन इसमें कुछ बिन्दुओं पर चल रही कानूनी प्रक्रिया की वजह से देरी हो रही है। बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या पर देश के कई बैंकों के कुल मिलाकर करीब नौ हजार करोड़ रुपए बकाया हैं।